लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ बिहार के प्रकाश राय का नाम, पैतृक गांव और साहित्यिक मंच को भी मिली वैश्विक पहचान

Written by Sanjay Kumar

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समस्तीपुर (अपना नालंदा)। बिहार के समस्तीपुर जिले के मोरवा प्रखंड अंतर्गत सारंगपुर पूर्वी पंचायत के लिए यह गौरव और खुशी का अवसर है। पंचायत निवासी कृषक उपेन्द्र राय एवं धार्मिक महिला कुमारी निशा सिन्हा के होनहार सुपुत्र, युवा साहित्यकार, कवि, दार्शनिक एवं समाजसेवी प्रकाश राय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर जिले के साथ-साथ पूरे बिहार और देश का नाम रोशन किया है। उनकी साहित्यिक एवं सामाजिक सेवाओं को देखते हुए उनका नाम प्रतिष्ठित लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंग्लैंड (यूके)में दर्ज किया गया है।

इस उपलब्धि की एक खास बात यह भी है कि प्रकाश राय के साथ उनके पैतृक गांव सारंगपुर, प्रखंड मोरवा, जिला समस्तीपुर, बिहार का नाम भी लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इसके अलावा उनके द्वारा संचालित अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच ‘कलम मेरी पहचान वैश्विक साहित्यिक परिवार (रजि.)’ को भी इस वैश्विक उपलब्धि में स्थान मिला है। इस प्रकार प्रकाश राय की व्यक्तिगत पहचान के साथ उनके गांव और साहित्यिक संस्था को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त हुई है।

लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने का प्रमाण पत्र यूरोपियन यूनियन के हेड एवं रिपब्लिक ऑफ क्रोएशिया के डॉ. इवान गेसिना द्वारा प्रदान किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में भारत के इंटरनेशनल चेयरमैन डॉ. अविनाश डी. सकुन्डे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सम्मान से प्रकाश राय के परिवार, शुभचिंतकों, साहित्यिक जगत और समस्तीपुर जिले में हर्ष का माहौल है।

पहले भी दो बार स्थापित कर चुके हैं विश्व स्तरीय कीर्तिमान

उल्लेखनीय है कि प्रकाश राय की यह उपलब्धि उनकी साहित्यिक यात्रा का पहला अंतरराष्ट्रीय पड़ाव नहीं है। इससे पूर्व वर्ष 2022 में भी उन्होंने अपनी साहित्यिक प्रतिभा के बल पर दो महत्वपूर्ण विश्व स्तरीय आयोजनों में सहभागिता कर कीर्तिमान स्थापित किया था।

वर्ष 2022 में हिंददेश परिवार एवं साहित्योदय साहित्यिक संस्था (भारत) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विश्व स्तरीय वर्चुअल कवि सम्मेलन में उन्होंने प्रतिभागी के रूप में हिस्सा लिया था। इस आयोजन में सहभागिता कर उन्होंने विश्व स्तरीय वर्चुअल कवि सम्मेलन के कीर्तिमान में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

इसी वर्ष बुलंदी साहित्यिक संस्था, उत्तराखंड (भारत) के तत्वावधान में आयोजित एक अन्य विश्व स्तरीय वर्चुअल कवि सम्मेलन में भी उन्हें आमंत्रण प्राप्त हुआ। आमंत्रण पर उन्होंने दूसरी बार इस वैश्विक साहित्यिक आयोजन में सहभागिता की और अपने नाम एक और विश्व स्तरीय उपलब्धि दर्ज कराई। इन आयोजनों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंचों पर एक अलग पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ग्लोबल अंबेसडर के पद पर मनोनयन, गांधी पीस सम्मान से भी सम्मानित

प्रकाश राय को हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय सामाजिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहचान मिली है। अंतरराष्ट्रीय सामाजिक संस्था एमजीजीपी इंडिया फाउंडेशन के यूएसए ग्लोबल डायरेक्टर डॉ. माइक लिटमैन ने उन्हें संस्था के ग्लोबल अंबेसडर के पद पर मनोनीत करते हुए मनोनयन प्रमाण पत्र प्रदान किया। इसके साथ ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय गांधी पीस सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

यह सम्मान उनके साहित्यिक योगदान के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों, मानवीय मूल्यों, समाजसेवा और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संदेश फैलाने के प्रयासों को मिली पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

20 से अधिक देशों से मिल चुके हैं अंतरराष्ट्रीय सम्मान

प्रकाश राय की साहित्यिक एवं सामाजिक गतिविधियों का दायरा भारत तक सीमित नहीं रहा है। उन्हें दुनिया के लगभग 20 से 25 देशों से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मान पत्र एवं प्रशस्ति पत्र प्राप्त हो चुके हैं। इनमें मैक्सिको (उत्तरी अमेरिका), अमेरिका, ब्राजील, फिलिस्तीन, बांग्लादेश की राजधानी ढाका, घाना, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब, अल्बानिया, नाइजीरिया और इंडोनेशिया सहित कई देशों के नाम शामिल हैं।

अब तक भारत सहित विदेशों की विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय सम्मान पत्रों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी इस उपलब्धि के पीछे निरंतर साहित्य साधना, लेखन के प्रति समर्पण, सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव और विभिन्न देशों के साहित्यकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ उनका संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देश-विदेश के साहित्यकारों और समाजसेवियों ने दी बधाई

प्रकाश राय की इस वैश्विक उपलब्धि पर देश-विदेश की सैकड़ों साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं के ग्लोबल डायरेक्टर, अंबेसडर, अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के लेखक, कवि, दार्शनिक और समाजसेवियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। लोगों ने कहा कि एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंचों पर अपनी पहचान स्थापित करना युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

इस अवसर पर मोरवा के वर्तमान विधायक रणविजय साहू, लोजपा के युवा नेता अभय सिंह, समस्तीपुर एवं पूसा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सौरभ कुमार समदर्शी, मध्यप्रदेश के कमिश्नर सौरभ कुमार सुमन (पैतृक आवास बिशनपुर, बेगूसराय, बिहार), ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के भूतपूर्व वयस्क विभाग के कुलपति एवं एनडी कॉलेज के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. बिन्देश्वर दास, समस्तीपुर कॉलेज के पीजी विभाग के अंग्रेजी के प्रोफेसर डॉ. उमाशंकर साह, कर्पूरी ग्राम कॉलेज के गणित विभाग के प्रोफेसर दिनेश साह ने बधाई दी।

इसके अलावा समस्तीपुर की विकासशील इंसान पार्टी की महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष पुष्पा सहनी, युवा भारत विकास संगठन, जंदाहा (वैशाली) की सुश्री वर्षा ठाकुर, मातृभाषा हिंदी संगठन, पटना के संस्थापक कुमार लक्ष्मीकांत, रामदुलारी साहित्यकार मंडल, पटोरी (समस्तीपुर) के अध्यक्ष विकास कुमार, हरपुर बढ़ेता के पूर्व मुखिया ताराकांत राय उर्फ गौतम राय, मोरवा के जन सुराज नेता एवं समाजसेवी जयकृष्ण राय, सरयुग महाविद्यालय के वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर जगदीश राय तथा मुखिया मनोज राय सहित अनेक गणमान्य लोगों ने प्रकाश राय को शुभकामनाएं दीं।

गांव से वैश्विक मंच तक का प्रेरणादायक सफर

प्रकाश राय की इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। ग्रामीण परिवेश से निकलकर साहित्य, दर्शन और समाजसेवा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाना अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। विशेष रूप से उनके पैतृक गांव सारंगपुर और साहित्यिक मंच ‘कलम मेरी पहचान वैश्विक साहित्यिक परिवार’ का नाम भी लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होना क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।

प्रकाश राय की इस सफलता से समस्तीपुर सहित पूरे बिहार के साहित्यिक एवं सामाजिक जगत में खुशी की लहर है। लोगों को उम्मीद है कि वे भविष्य में भी अपनी लेखनी, विचारों और सामाजिक कार्यों के माध्यम से देश-विदेश में बिहार की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक पहचान को मजबूत करते रहेंगे।

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