हुलासगंज में घायल मरीजों के इलाज में लापरवाही पर प्रशासन सख्त, तीन चिकित्सकों पर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा

Written by Sanjay Kumar

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अजीत कुमार
जहानाबाद (अपना नालंदा)। हुलासगंज प्रखंड में दुर्घटना के दो पीड़ितों के उपचार में कथित लापरवाही और घायल पैर में कार्डबोर्ड बांधकर सदर अस्पताल, जहानाबाद रेफर किए जाने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। अखबार एवं सोशल मीडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आने के बाद जिला पदाधिकारी श्रीमती छिरिङ वाई भूटिया ने तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच में चिकित्सकीय स्तर पर गंभीर लापरवाही एवं कर्तव्य के प्रति उदासीनता सामने आने के बाद प्रशासन ने संबंधित तीन चिकित्सकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने की अनुशंसा स्वास्थ्य विभाग को भेज दी है।
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बिना देरी किए संबंधित चिकित्सकों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए अनुमंडल पदाधिकारी, जहानाबाद की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति में सिविल सर्जन एवं प्रभारी अधीक्षक, सदर अस्पताल, जहानाबाद को भी शामिल किया गया था।
जांच में सामने आई उपचार व्यवस्था की गंभीर खामियां
जांच समिति ने मामले से जुड़े अभिलेखों, उपचार व्यवस्था एवं संबंधित चिकित्सकों की भूमिका की पड़ताल करने के बाद अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी। रिपोर्ट में बताया गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), हुलासगंज में POP स्लैब/कास्ट लगाने की सुविधा और इसके लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध थी, इसके बावजूद दुर्घटना में घायल मरीजों के अंगों को समुचित तरीके से स्थिर किए बिना उन्हें सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
मामले में सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि घायल पैर को उचित चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत स्थिर करने के बजाय कार्डबोर्ड का सहारा देकर मरीज को आगे रेफर किए जाने की बात सामने आई। प्रशासन ने इसे मरीजों की चिकित्सा जरूरतों के अनुरूप कार्रवाई नहीं मानते हुए गंभीरता से लिया।


जांच में यह भी पाया गया कि सदर अस्पताल, जहानाबाद में मरीजों को अपेक्षित तत्परता और गंभीरता के साथ उपचार उपलब्ध नहीं कराया गया। जांच समिति के अनुसार संबंधित चिकित्सकों के स्तर पर उपचार के दौरान गंभीर लापरवाही तथा कर्तव्य के प्रति उदासीनता पाई गई।
CHC में ड्यूटी रोस्टर को लेकर भी सवाल
जांच के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण खामी भी सामने आई। समिति ने पाया कि CHC हुलासगंज में समुचित ड्यूटी रोस्टर तैयार नहीं किया गया था। आपातकालीन मरीजों के उपचार के लिए संबंधित समय पर केवल एक AYUSH चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति होने की बात भी जांच में सामने आई।
जिला प्रशासन ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना है। इस मामले में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, CHC हुलासगंज से भी 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रशासन यह जानना चाहता है कि आपातकालीन मरीजों के लिए समुचित चिकित्सकीय व्यवस्था और ड्यूटी रोस्टर क्यों सुनिश्चित नहीं किया गया।
चिकित्सकों का स्पष्टीकरण भी मिला असंतोषजनक
जांच के प्रारंभिक चरण में संबंधित तीनों चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। उनके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण की भी जांच समिति एवं जिला प्रशासन द्वारा समीक्षा की गई। प्रशासन के अनुसार तीनों चिकित्सकों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।
उपलब्ध अभिलेखों, जांच समिति की रिपोर्ट और चिकित्सकों के असंतोषजनक स्पष्टीकरण को आधार बनाते हुए जिला पदाधिकारी ने तीनों चिकित्सकों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने की अनुशंसा की है। यह अनुशंसा आज ही स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई है।
लापरवाही पर नहीं होगा समझौता
जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति में मरीज को समय पर समुचित उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
प्रशासन ने कहा है कि मरीजों के उपचार में लापरवाही, ड्यूटी से अनुपस्थिति अथवा बिना उचित चिकित्सकीय कारण के अनावश्यक रेफरल किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों एवं कर्मियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जाएगी।
जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में जिम्मेदारी से समझौता करने वाले पदाधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। हुलासगंज की घटना में की गई कार्रवाई को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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