राकेश कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। हरनौत बाजार स्थित कन्या मध्य विद्यालय में शनिवार को रक्षाबंधन पर्व हर्षोल्लास, उमंग और उत्सवी माहौल के बीच मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की भावनात्मक झलक देखने को मिली। छात्राओं ने विद्यालय के छात्रों की कलाई पर राखी बांधकर भाई-बहन के प्रेम, स्नेह, विश्वास और आपसी सहयोग का संदेश दिया। राखी बांधने के बाद छात्र-छात्राओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। छात्राओं ने अपने भाइयों कोऊ चॉकलेट भी उपहार स्वरूप भेंट की।

कार्यक्रम को लेकर विद्यालय में सुबह से ही उत्साह का माहौल बना रहा। छात्राएं अपने हाथों से तैयार की गई रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियां लेकर विद्यालय पहुंचीं। विद्यालय की शिक्षिका पम्मी देवी ने बताया कि कक्षा पहली से आठवीं तक की छात्राओं ने रक्षाबंधन को लेकर विशेष तैयारी की थी। छात्राओं ने स्वयं अपने हाथों से सुंदर राखियां तैयार कीं, जिससे उनमें रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता की भावना भी विकसित हुई।

विद्यालय परिसर में विधिवत रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। छात्राओं ने छात्रों की कलाई पर राखी बांधते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं छात्रों ने भी अपनी बहनों की रक्षा करने और उनके सम्मान का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को रक्षाबंधन पर्व की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपरा के बारे में जानकारी दी गई। शिक्षकों ने बताया कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है।
नाटक के जरिए दिया प्लास्टिक मुक्त समाज का संदेश
रक्षाबंधन कार्यक्रम के साथ विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने प्लास्टिक के उपयोग से होने वाले नुकसान पर आधारित जागरूकता नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से बच्चों ने बताया कि प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण, जल, मिट्टी और जीव-जंतुओं के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है।
विद्यार्थियों ने लोगों से प्लास्टिक की थैलियों एवं अन्य एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं का कम से कम इस्तेमाल करने की अपील की। साथ ही कपड़े या जूट के थैले का उपयोग करने, कचरे को निर्धारित स्थान पर डालने और विद्यालय एवं आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने का संदेश दिया। बच्चों की प्रस्तुति ने उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया। नाटक के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
संस्कृति के साथ पर्यावरण संरक्षण की सीख
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने कहा कि विद्यालय में इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य बच्चों को केवल त्योहार मनाने तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना भी है। रक्षाबंधन जैसे पर्व विद्यार्थियों में भाईचारा, प्रेम, सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। वहीं पर्यावरण आधारित कार्यक्रम बच्चों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने में मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए तो भविष्य में वे जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर प्लास्टिक मुक्त समाज का संदेश देना कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि रही।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें पर्व की शुभकामनाएं दीं। मौके पर प्रधानाध्यापिका, विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह, उमंग और भाई-बहन के प्रेम के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देखने को मिला।







