हरिओम कुमार
हरनौत (अपना नालंदा)। बिहार सरकार जहां सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड का प्राथमिक विद्यालय महवाचक शिक्षा व्यवस्था की एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। इस विद्यालय में पिछले आठ वर्षों से एक भी छात्र नामांकित नहीं है। नतीजा यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बना दो मंजिला (जी प्लस वन) विद्यालय भवन वीरान पड़ा है। मुख्य द्वार पर जंग लगा ताला इस बात की गवाही देता है कि यहां वर्षों से पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह ठप है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने बताया कि स्कूल की स्थापना वर्ष 1980 में हुई थी। एक समय ऐसा था जब यहां 50 से 60 बच्चों का नामांकन रहता था और प्रतिदिन 30 से 40 छात्र-छात्राएं नियमित रूप से पढ़ने आते थे। वर्ष 2012-13 तक विद्यालय में नामांकन संतोषजनक था, लेकिन इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे बदलने लगी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में गांव सड़क मार्ग से जुड़ने के बाद अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला आसपास के बड़े और सुविधासंपन्न विद्यालयों में कराना शुरू कर दिया। इसका असर यह हुआ कि हर साल विद्यालय में बच्चों की संख्या घटती गई और वर्ष 2018 तक नामांकन पूरी तरह शून्य हो गया, जो आज तक बरकरार है।
विद्यालय में बच्चों को आकर्षित करने के लिए सरकार की ओर से मध्याह्न भोजन, निःशुल्क ड्रेस, छात्रवृत्ति, साइकिल योजना समेत कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गईं, लेकिन इनका भी कोई असर नहीं पड़ा। पहले यू-डाइस पोर्टल पर औपचारिक रूप से बच्चों की संख्या दर्ज कर दी जाती थी, जिससे विद्यालय को बजट मिलता रहता था। अब यू-डाइस प्लस पर प्रत्येक छात्र का पूरा विवरण दर्ज करना अनिवार्य है, इसलिए वास्तविक स्थिति के अनुसार विद्यालय में शून्य नामांकन दर्ज करना पड़ रहा है।
महवाचक, छतियाना राजस्व गांव का एक टोला है। यहां लगभग 70 से 75 परिवार रहते हैं। गांव की आबादी करीब 1000 तथा 450 मतदाता हैं। अधिकांश परिवार नौकरी और व्यवसाय से जुड़े हैं। कई लोग अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए शहरों या अन्य स्थानों पर रह रहे हैं, जबकि गांव में बुजुर्गों की संख्या अधिक है। गांव के बच्चे भी अब आसपास के दूसरे विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं।
विद्यालय में पहले एक शिक्षक और दो शिक्षिकाएं कार्यरत थीं, लेकिन छात्रों के अभाव में सभी का स्थानांतरण दूसरे विद्यालयों में कर दिया गया। पिछले चार दिनों से यहां दोनों शिक्षिकाओं की दैनिक उपस्थिति भी दर्ज नहीं हो रही है। फिलहाल विद्यालय भवन पूरी तरह खाली पड़ा है।
इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) नितेश कुमार रंजन ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए बच्चों का नामांकन बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों की अनुपस्थिति के कारण पिछले दो वर्षों से यहां पदस्थापित सभी शिक्षकों को यूएमएस छतियाना में प्रतिनियुक्त किया गया है, ताकि उनकी सेवाओं का उपयोग दूसरे विद्यालय में किया जा सके।
महवाचक प्राथमिक विद्यालय की यह स्थिति शिक्षा विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सरकारी संसाधनों से निर्मित विद्यालय भवन वर्षों से खाली पड़ा है और शिक्षा का केंद्र बनने के बजाय एक बंद इमारत में तब्दील हो गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, बेहतर सुविधाएं और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तो भविष्य में फिर से यहां बच्चों की चहल-पहल लौट सकती है।
8 साल से सूना पड़ा महवाचक स्कूल, न छात्र बचे न शिक्षक, बंद पड़ा सरकारी भवन
Written by Sanjay Kumar
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