संजय कुमार/अखिलेंद्र कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। नालंदा जिले के समग्र एवं सुनियोजित विकास को लेकर शुक्रवार को समाहरणालय स्थित हरदेव भवन सभागार में राजगीर रीजनल प्लानिंग एरिया (आरआरपीए) मास्टर प्लान-2045 के स्टेज-5 मसौदे पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रमंडलीय आयुक्त सह अध्यक्ष, नालंदा आयोजना क्षेत्र प्राधिकार मयंक वरवड़े ने की। बैठक की शुरुआत आयुक्त का हरित पौधा भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। इसमें जिलाधिकारी उदिता सिंह, पुलिस अधीक्षक भारत सोनी, नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), नालंदा लोकसभा क्षेत्र के सांसद कौशलेन्द्र कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के प्रतिनिधि, विधान परिषद सदस्य रीना यादव, नगर परिषद राजगीर की मुख्य पार्षद जीरो देवी, उप मुख्य पार्षद मुन्नी देवी, राजगीर नगर परिषद तथा सिलाव, नालंदा और गिरियक नगर पंचायतों के सभापति एवं उपसभापति सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक का उद्देश्य राजगीर रीजनल प्लानिंग एरिया मास्टर प्लान-2045 के मसौदे पर जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श कर सुझाव प्राप्त करना था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभी ड्राफ्ट (प्रारूप) है तथा प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा।
पांच नगरों को मिलेगी अलग पहचान
बैठक में जिलाधिकारी उदिता सिंह ने मास्टर प्लान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि योजना के तहत पांच प्रमुख नगरों को उनकी विशिष्ट पहचान के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इसके तहत राजगीर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन एवं संस्थागत हब, नालंदा को विश्व धरोहर एवं वेलनेस टूरिज्म हब, सिलाव को क्षेत्रीय व्यापार एवं थोक वाणिज्य केंद्र, पावापुरी को शिक्षा एवं उच्च स्तरीय सेवाओं का केंद्र तथा गिरियक को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2045 तक क्षेत्र की आबादी लगभग दोगुनी होने का अनुमान है। इसे देखते हुए आवास, सड़क, जलापूर्ति, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं का दीर्घकालिक खाका तैयार किया गया है ताकि भविष्य में अनियोजित विकास, यातायात जाम और पर्यावरणीय समस्याओं से बचा जा सके।
पर्यटन और आधारभूत संरचना पर विशेष फोकस
मास्टर प्लान में पर्यटन को विकास का प्रमुख आधार बनाया गया है। राजगीर, नालंदा और पावापुरी में विश्वस्तरीय पर्यटन पार्क, सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी, ओपन एयर थिएटर, हस्तशिल्प संग्रहालय, आधुनिक होटल, रिसॉर्ट और रेस्तरां विकसित किए जाएंगे। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मेडिटेशन सेंटर, वेलनेस रिसॉर्ट तथा इको-टूरिज्म परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं।
पर्यटकों की सुविधा के लिए चार नए बस टर्मिनल, चार स्थानों पर मल्टी लेवल कार पार्किंग, राजगीर, नालंदा और सिलाव रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण, नई संपर्क सड़कें, प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण, रेल ओवरब्रिज, अंडरपास, ई-बस सेवा, गोल्फ कार्ट, साइकिल ट्रैक तथा डिजिटल गाइड सिस्टम विकसित किए जाएंगे। साथ ही पीपीपी मॉडल पर राजगीर और नालंदा में फाइव स्टार होटल बनाने का भी प्रस्ताव है।
उद्योग, रोजगार और कृषि को मिलेगा बढ़ावा
योजना में तीन एग्रो बेस्ड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ), फूड पार्क, डेयरी, कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, मत्स्य पालन केंद्र तथा कोल्ड चेन नेटवर्क विकसित करने का प्रावधान किया गया है। नालंदा विश्वविद्यालय के आसपास आईटी पार्क स्थापित करने की भी योजना है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
स्वास्थ्य और शिक्षा में होगा बड़ा निवेश
मास्टर प्लान के अनुसार वर्ष 2045 तक चार 500 बेड वाले अत्याधुनिक अस्पताल, पांच 200 बेड वाले अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, आधुनिक डायग्नोस्टिक सेंटर, पशु चिकित्सालय, वन स्टॉप सेंटर, फायर स्टेशन तथा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा नए विद्यालय, कॉलेज, उच्च शिक्षण संस्थान तथा अनुसंधान केंद्र भी विकसित किए जाएंगे।
जनप्रतिनिधियों ने दिए सुझाव
बैठक को संबोधित करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त मयंक वरवड़े ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय संसाधनों की होगी, लेकिन सभी हितधारकों के सुझाव अंतिम मसौदे में शामिल किए जाएंगे।
सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने कहा कि मास्टर प्लान में हवाई अड्डे का भी प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा के बाद ही अंतिम मसौदा तैयार किया जाए। उन्होंने मसौदे की सराहना करते हुए कहा कि इसमें कुछ सुधार की आवश्यकता है, लेकिन समग्र रूप से योजना बेहतर है।
विधान परिषद सदस्य रीना यादव ने कहा कि राजगीर के साथ-साथ सिलाव के विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के प्रतिनिधि ने कहा कि राजगीर में अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के दौरान स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है। इसका स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने पहाड़ों से आने वाले प्राकृतिक जल प्रवाह के अवरुद्ध होने का अध्ययन कराने तथा वेंडर जोन स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
नगर परिषद राजगीर की मुख्य पार्षद जीरो देवी ने कहा कि विकास स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए। सड़क किनारे छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाए।
बैठक के अंत में अधिकारियों ने बताया कि मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने से पहले जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। आवश्यक संशोधनों के बाद इसे लागू किया जाएगा। यह योजना आने वाले दो दशकों में राजगीर, नालंदा, सिलाव, पावापुरी और गिरियक को पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
राजगीर रीजनल मास्टर प्लान-2045 पर मंथन, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा और विरासत संरक्षण के साथ विकास का रोडमैप तैयार
Written by Sanjay Kumar
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