अजीत कुमार
जहानाबाद (अपना नालंदा)। जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा और कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभिभावकों ने प्रशासन एवं शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन अक्सर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही सक्रिय होता है, जबकि पहले से मौजूद खामियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
अभिभावकों ने सिकरिया में हुई उस दर्दनाक घटना का उदाहरण दिया, जिसमें एक स्कूली बस ने अपने ही छात्र को कुचल दिया था। घटना के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल वाहनों की जांच और छोटे वाहनों के उपयोग पर रोक संबंधी निर्देश जारी किए थे। कुछ दिनों तक जांच अभियान भी चला, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आज भी जिले के कई निजी स्कूलों में बच्चों को थ्री-व्हीलर टेंपो और अन्य छोटे वाहनों में क्षमता से अधिक संख्या में बैठाकर लाया-ले जाया जा रहा है। इनमें अधिकांश बच्चे नर्सरी से लेकर तीसरी कक्षा तक के होते हैं।
इधर, हाल ही में अन्य राज्यों में कोचिंग संस्थानों में हुई घटनाओं के बाद जहानाबाद में भी फायर ब्रिगेड एवं संबंधित विभागों द्वारा कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया गया। हालांकि अभिभावकों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान कई संस्थानों में केवल औपचारिकता निभाई गई। किसी भी कोचिंग संस्थान को तत्काल बंद नहीं कराया गया और न ही सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की गई।
शहर के मालहचक चौक मोड़ से लेकर उंटा मोड़ तक सैकड़ों की संख्या में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। इनमें पढ़ने के लिए जिले के विभिन्न प्रखंडों के अलावा आसपास के जिलों से भी छात्र-छात्राएं प्रतिदिन ट्रेन और अन्य साधनों से पहुंचते हैं। आरोप है कि इनमें से कई संस्थानों के पास आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास द्वार, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
अभिभावकों का कहना है कि विशेष रूप से छात्राओं के लिए सुरक्षित एवं पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। कई कोचिंग संस्थानों में एक ही कमरे में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को बैठाकर कक्षाएं संचालित की जाती हैं, जिससे किसी आपात स्थिति में गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
लोगों का आरोप है कि शिक्षा विभाग समय-समय पर चेतावनी और दिशा-निर्देश तो जारी करता है, लेकिन उनके अनुपालन की नियमित निगरानी नहीं होती। फायर विभाग द्वारा निरीक्षण के बाद दिए गए निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी प्रभावी जांच नहीं की जाती।
अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी कोचिंग संस्थानों एवं स्कूल वाहनों की व्यापक जांच कराई जाए। सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना से पहले ही आवश्यक कदम उठाए जा सकें। उनका कहना है कि प्रशासन को हादसे का इंतजार करने के बजाय पहले से सतर्क होकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
दुर्घटना के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन? जहानाबाद में अवैध कोचिंग और स्कूली वाहनों की सुरक्षा पर उठे सवाल
Written by Sanjay Kumar
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