राजगीर (अपना नालंदा)। नालंदा जिले के राजगीर स्थित दशरथ किला झुनकिया बाबा मंदिर से जुड़े चर्चित दोहरे हत्याकांड में अब एक नया मोड़ आ गया है। मामले की जांच कर रही पुलिस टीम की कार्यशैली पर मंदिर के महंत एवं अखिल भारतीय महामंडलेश्वर स्वामी अंतर्यामी शरण जी महाराज ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसी वास्तविक दोषियों तक पहुंचने के बजाय निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर मामले की दिशा भटकाने का काम कर रही है।
रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए महंत ने कहा कि पुलिस जिन लोगों को गिरफ्तार कर रही है, उनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं जिनका घटना से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पानी बेचने वाले और एंबुलेंस चालक जैसे लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस अपनी उपलब्धि दिखाने का प्रयास कर रही है, जबकि घटना के पीछे की वास्तविक साजिश और असली आरोपियों तक पहुंचने की गंभीर कोशिश नहीं की जा रही है।
महंत स्वामी अंतर्यामी शरण ने दावा किया कि मृतक पिंटू कुमार और श्रवण कुमार को उनके गांव गंजपर से राजगीर लाने वाले चार युवकों की भूमिका पूरे मामले में बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि मृतकों की मां और बहन लगातार यह आरोप लगा रही हैं कि गांव के ही कुछ लोग दोनों युवकों को राजगीर मलमास मेला घुमाने और भंडारा कराने के बहाने अपने साथ लेकर आए थे। इसके बावजूद पुलिस ने अब तक उन चार युवकों से न तो गंभीर पूछताछ की है और न ही उनकी भूमिका की गहराई से जांच की है।
महंत ने सवाल उठाया कि यदि जांच एजेंसी निष्पक्ष तरीके से काम कर रही है तो उन चार युवकों से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही, जो मृतकों के साथ अंतिम बार देखे गए थे। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवार की बातों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि परिवार लगातार कुछ लोगों पर संदेह जता रहा है। इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
उन्होंने घटना के घटनाक्रम पर भी कई प्रश्न उठाए। महंत ने कहा कि यदि दोनों युवक केवल मंदिर परिसर में आयोजित भंडारे में भोजन करने आए थे, तो वे मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर आने के बजाय पीछे की दीवार फांदकर परिसर में क्यों पहुंचे। यह एक महत्वपूर्ण सवाल है, जिसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मारपीट और विवाद की वास्तविक घटना मंदिर परिसर के अंदर नहीं, बल्कि मंदिर से सटे खेत में हुई थी। ऐसे में केवल मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तारी करना उचित नहीं माना जा सकता।
महंत के अनुसार पुलिस मंदिर के सीसीटीवी कैमरों में दिखाई देने वाले लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय लोग और पानी लेने आने वाले लोग आते-जाते रहते हैं। केवल फुटेज में दिखाई देने के आधार पर लोगों को आरोपी मान लेना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस घटना की गहन पड़ताल करने के बजाय आसान रास्ता अपनाकर कुछ लोगों को गिरफ्तार कर रही है।
स्वामी अंतर्यामी शरण ने यह भी कहा कि मृतकों की मां कई बार सार्वजनिक मंचों पर और मीडिया के सामने गांव के चार युवकों के नाम लेकर उन पर संदेह जता चुकी हैं। इस संबंध में समाचार पत्रों में भी खबरें प्रकाशित हुई हैं। इसके बावजूद पुलिस की चुप्पी और निष्क्रियता लोगों के बीच कई तरह के सवाल पैदा कर रही है।
महंत ने जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) तथा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (डीएसपी) स्वयं इस मामले की समीक्षा करें और सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जांच कराएं। उनका दावा है कि यदि गंजपर गांव के उन चार युवकों से निष्पक्ष और गहन पूछताछ की जाए तो पूरे हत्याकांड का रहस्य जल्द सामने आ सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में पूर्व में हुई चोरी की घटनाओं को लेकर दिए गए आवेदन और शिकायतों पर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। महंत ने कहा कि जनता को न्याय दिलाने और सच्चाई सामने लाने के लिए जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव और पक्षपात के काम करना चाहिए।
फिलहाल झुनकिया बाबा मंदिर दोहरे हत्याकांड में महंत के इन आरोपों के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि महंत द्वारा उठाए गए सवालों पर गंभीरता से विचार किया जाता है तो जांच की दिशा में नए तथ्य सामने आ सकते हैं और मामले की सच्चाई तक पहुंचने का रास्ता भी खुल सकता है।







