संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)।बिहारशरीफ जिला मुख्यालय का भराव पर चौराहा शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण चौराहों में से एक माना जाता है। दिनभर यहां वाहनों की लंबी कतारें, टोटो की भीड़ और राहगीरों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। लेकिन हैरत की बात यह है कि जिस काम के लिए यहां पांच-पांच ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, उस जिम्मेदारी को एक आम नागरिक अकेले निभाता नजर आता है।
यह शख्स हैं संजय कुमार, जिन्हें स्थानीय लोग प्यार से “संजू” के नाम से जानते हैं। भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त संजू भराव चौराहे से कुछ ही दूरी पर रहते हैं। रोजाना जब लोग इस चौराहे से गुजरते हैं तो उन्हें सादे लिबास में ट्रैफिक संभालते हुए आसानी से देखा जा सकता है। न उनके पास कोई सरकारी अधिकार है और न ही कोई वेतन, लेकिन शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उनका समर्पण किसी सरकारी कर्मचारी से कम नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भराव चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक रहती है, लेकिन कई बार पुलिसकर्मी निर्धारित समय पर मौजूद नहीं दिखते। वहीं कुछ पुलिसकर्मी चौराहे के आसपास अतिक्रमण कर सड़क किनारे दुकान लगाने वालों के बीच बैठकर मोबाइल चलाते नजर आते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि सड़क पर फल दुकानदारों का कब्जा बढ़ जाता है और टोटो चालक बीच चौराहे पर वाहन खड़ा कर सवारी का इंतजार करने लगते हैं, जिससे जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
ऐसे हालात में संजू बिना किसी स्वार्थ के सड़क पर उतरते हैं और यातायात को नियंत्रित करने में जुट जाते हैं। चाहे जाम कितना भी बड़ा क्यों न हो, वे उसे खत्म कराने के लिए पूरी मेहनत करते हैं। कभी समझाकर, तो कभी सख्ती दिखाकर वे टोटो चालकों और वाहन चालकों को व्यवस्थित करते हैं। उनकी सक्रियता के कारण कई बार कुछ ही मिनटों में जाम की समस्या समाप्त हो जाती है।
सबसे बड़ी बात यह है कि वर्षों से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने वाले इस व्यक्ति को अब तक जिला प्रशासन की ओर से किसी मंच पर सम्मानित नहीं किया गया है। जबकि ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणा होते हैं। यदि प्रशासन संजू जैसे नागरिकों को सम्मानित करे तो न केवल उनका मनोबल बढ़ेगा, बल्कि अन्य लोग भी समाज सेवा और नागरिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित होंगे।
आज जरूरत इस बात की है कि बिना किसी आर्थिक लाभ और व्यक्तिगत स्वार्थ के समाज के लिए काम करने वाले संजय कुमार उर्फ संजू जैसे लोगों की पहचान हो, उन्हें सम्मान मिले और उनकी सेवा भावना को उचित मंच प्रदान किया जाए। ऐसे ही लोग समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बनते हैं।
5 ट्रैफिक पुलिस पर भारी पड़ा एक आम नागरिक! भराव चौराहा का ‘रियल ट्रैफिक हीरो’ संजू बना लोगों की उम्मीद
Written by Sanjay Kumar
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