प्रगति आइकॉनिक क्लासेस में अंतरराष्ट्रीय कवयित्री अंकिता सिन्हा का भव्य स्वागत, छात्रों को दिया प्रेरक संदेश

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। सोमवार को बिहारशरीफ के कांटा पर स्थित प्रगति आइकॉनिक क्लासेस में एक भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कवयित्री एवं लेखिका अंकिता सिन्हा का संस्थान की डायरेक्टर प्रगति आनंद द्वारा गुलदस्ता भेंट कर तथा शाल ओढ़ाकर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिनंदन किया।


कार्यक्रम के दौरान अंकिता सिन्हा ने अपनी चर्चित कविताओं का पाठ किया। उनकी ओजपूर्ण, संवेदनशील और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। कविता पाठ के दौरान कई बार सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। विद्यार्थियों ने भी उनकी कविताओं को बड़े ध्यान से सुना और उनसे साहित्य, लेखन तथा जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रेरणादायक बातें सीखीं।


संस्थान की निदेशक प्रगति आनंद ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और ऐसे रचनाकार युवाओं को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता सिन्हा जैसी प्रतिष्ठित कवयित्री का संस्थान में आगमन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक अवसर है। इससे छात्रों में साहित्य और सृजनात्मक लेखन के प्रति रुचि बढ़ेगी।
इस अवसर पर विक्की सर, रेखा गुप्ता, खुशबू सिन्हा, सुलेखा कुमारी, रवि नंदन, बबलू गुप्ता, गौरव मिश्रा तथा संजय कुमार सिन्हा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने कवयित्री के विचारों और रचनाओं की सराहना की तथा उन्हें साहित्य जगत की महत्वपूर्ण हस्ती बताया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी मौजूद रहे। इनमें चंद्रभान कुमार, अमन वर्मा, बिट्टू शर्मा, वंदना कुमारी, शिवानी कुमारी, अनुषा शर्मा, सिंपल कुमारी, सीमा कुमारी, स्वीकृति कुमारी, सुहानी कुमारी, भव्या कुमारी, रश्मि कुमारी, मिन्नी कुमारी, विभा कुमारी, संगीता कुमारी, पिन्नी कुमारी, अर्चना कुमारी, श्रेया कुमारी, हेमंत कुमारी, प्रिया कुमारी, शमीमा परवीन, रिचा कुमारी और खुशबू कुमारी सहित दर्जनों विद्यार्थी शामिल थे। सभी विद्यार्थियों ने कवयित्री का स्वागत किया तथा उनके अनुभवों से प्रेरणा प्राप्त की।
अंकिता सिन्हा का जन्म 4 अप्रैल 1990 को बिहार के गया जिले में हुआ था। उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की और साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी प्रकाशित काव्य संग्रह पुस्तक “आकांक्षा” को पाठकों द्वारा काफी सराहा गया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कई सहयोगी साहित्यिक संकलनों में भी अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई है।
साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अंकिता सिन्हा को देश के विभिन्न राज्यों में सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें दिल्ली में आयोजित “एक शाम प्रकृति भक्तों के नाम” कार्यक्रम में भारतीय तिरंगा गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया। लखनऊ-लखीमपुर में अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दौरान उन्हें अरुणिमा स्मृति अवार्ड प्रदान किया गया। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साहित्य और प्रभावशाली कविता पाठ के लिए विशेष सम्मान मिला।
इसके अलावा बिहार के चंपारण में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्हें कलाम यूथ लीडरशिप अवार्ड से नवाजा गया। झारखंड महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। जमशेदपुर के टाउन हॉल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम “दिखा दे दम सीजन-2” में उन्हें विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मान मिला। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के 128 प्रतिभागियों ने भाग लिया था।
अंकिता सिन्हा की साहित्यिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उन्होंने आकाशवाणी और दूरदर्शन रांची पर भी कविता पाठ किया है। झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के विभिन्न साहित्यिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। वे असेंबली ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस की कोल्हान प्रमंडल सचिव भी हैं तथा झारखंड हिन्दी संस्कृति साहित्य मंच की सक्रिय सदस्य हैं।
उन्हें अजय भोजपुरी युवा स्मृति साहित्यिक सम्मान, कायस्थ गौरव सम्मान और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कवि कोकिल सम्मान जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाएं, राष्ट्रप्रेम तथा समकालीन परिस्थितियों का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान उनकी चर्चित पुस्तक और कोरोना काल पर लिखे गए विचारों की भी चर्चा हुई। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों की पीड़ा, संघर्ष और आशाओं को अभिव्यक्त किया है। विशेष रूप से कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान आम लोगों, बच्चों, मजदूरों तथा सामाजिक संस्थाओं की भूमिका पर आधारित उनके विचारों को व्यापक सराहना मिली है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने कवयित्री से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सरल और प्रेरणादायक उत्तर दिया। उन्होंने छात्रों से नियमित अध्ययन के साथ-साथ साहित्य पढ़ने और अपनी रचनात्मक क्षमता को विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को यादगार बताते हुए भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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