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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)।जनसुराज के व्यवसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कुमार विभूति ने प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से सोना खरीदने, तेल की खपत कम करने, विदेशी यात्राओं में संयम बरतने और अनावश्यक खर्चों से बचने की अपील पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है और केंद्र सरकार अब अपनी नीतिगत विफलताओं को छिपाने के लिए आम जनता की जीवनशैली और निजी खर्चों पर नैतिक दबाव बनाने का प्रयास कर रही है।

उपेंद्र कुमार ‘विभूति’ ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना होती है। लेकिन वर्तमान समय में देश की स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, बेरोजगारी चरम पर है और छोटे व्यापारियों से लेकर मध्यम वर्ग तक आर्थिक दबाव महसूस कर रहा है। ऐसे समय में सरकार को राहत देने वाली नीतियां लागू करनी चाहिए, न कि जनता को खर्च कम करने की सलाह देकर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील से देशभर के लाखों छोटे-बड़े स्वर्ण व्यवसायियों, कारीगरों और इस उद्योग से जुड़े परिवारों में चिंता का माहौल है। भारत में सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि पारंपरिक बचत, सामाजिक प्रतिष्ठा और लाखों परिवारों की आजीविका का प्रमुख माध्यम भी है। यदि लोग सोना खरीदना कम कर देंगे तो इसका सीधा असर ज्वेलरी बाजार, कारीगरों और छोटे दुकानदारों पर पड़ेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस उद्योग से जुड़े लोगों की आर्थिक क्षति की भरपाई कौन करेगा।
उपेंद्र कुमार ‘विभूति’ ने कहा कि देश में लाखों परिवार पीढ़ियों से स्वर्ण व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। छोटे शहरों और कस्बों में हजारों कारीगर हाथ से आभूषण बनाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। यदि सरकार लगातार इस प्रकार की अपील करेगी तो इससे बाजार में नकारात्मक संदेश जाएगा और व्यापार प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाने चाहिए, न कि लोगों को खरीदारी से रोकने जैसी बातें करनी चाहिए।
उन्होंने विदेशी यात्राओं और सरकारी खर्चों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि खर्चों में संयम की बात की जा रही है तो इसकी शुरुआत सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय से होनी चाहिए। देश में बड़े-बड़े सरकारी आयोजन, विज्ञापन अभियान, विदेश यात्राएं और भव्य कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में आम नागरिकों को संयम का पाठ पढ़ाना दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक अव्यवस्था पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह असफल रही है। पेट्रोल-डीजल, खाद्य पदार्थों, रसोई गैस और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे आम लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ठोस आर्थिक सुधारों की बजाय भावनात्मक अपीलों के सहारे जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
उपेंद्र कुमार ‘विभूति’ ने कहा कि देश को इस समय मजबूत आर्थिक नीतियों, निवेश बढ़ाने वाले निर्णयों और रोजगार सृजन की आवश्यकता है। युवाओं को रोजगार, व्यापारियों को स्थिर बाजार और आम जनता को महंगाई से राहत चाहिए। लेकिन सरकार इन मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर लोगों की निजी खर्च करने की आदतों पर टिप्पणी कर रही है, जो उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश की अर्थव्यवस्था उपभोग और व्यापारिक गतिविधियों पर आधारित है। यदि लोग खर्च करना कम कर देंगे तो बाजार की गति धीमी पड़ेगी, जिसका असर उत्पादन, रोजगार और व्यापार पर पड़ेगा। ऐसे में सरकार को अर्थव्यवस्था को गति देने वाले कदम उठाने चाहिए, ताकि बाजार मजबूत हो और लोगों की क्रय शक्ति बढ़े।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह आत्ममंथन करे और जनता पर नैतिक दबाव बनाने के बजाय आर्थिक सुधारों पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि देश की जनता पहले से ही महंगाई, टैक्स और आर्थिक दबाव का सामना कर रही है। ऐसे समय में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जिससे आम लोगों और व्यापारियों को राहत मिल सके।
अंत में उपेंद्र कुमार ‘विभूति’ ने कहा कि देश की आर्थिक चुनौतियों का समाधान केवल अपीलों और भाषणों से नहीं होगा। इसके लिए रोजगार बढ़ाने, छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहन देने, महंगाई नियंत्रित करने और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। तभी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आम जनता को वास्तविक राहत मिल सकेगी।







