मलमास मेला शुरू होने में दो दिन बाकी, फिर भी प्रचार-प्रसार ठप, पुराने बैनरों में दब गई विश्व प्रसिद्ध आस्था की पहचान

Written by Sanjay Kumar

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बिहारशरीफ (अपना नालंदा)।विश्व प्रसिद्ध राजकीय मलमास मेला की शुरुआत में अब महज दो दिन शेष रह गए हैं। रविवार से आरंभ होने वाला यह ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक मेला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र माना जाता है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक राजगीर पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मेला प्रारंभ होने से ठीक पहले शहर में प्रचार-प्रसार का अभाव लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजगीर शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, मुख्य मार्गों, पर्यटन स्थलों और मेला क्षेत्र में अब तक मलमास मेला से जुड़े बैनर, होर्डिंग, फ्लेक्स बोर्ड और स्वागत द्वार लगभग दिखाई नहीं दे रहे हैं। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर अभी भी पुराने राजगीर महोत्सव और कुंडलपुर महोत्सव के पोस्टर व बैनर लगे हुए हैं, जबकि विश्व प्रसिद्ध मलमास मेला की कोई झलक शहर में नजर नहीं आ रही है। इसे लेकर स्थानीय लोगों, दुकानदारों और मेला से जुड़े व्यवसायियों में नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि किसी भी बड़े धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन से पहले शहर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। जगह-जगह सूचना बोर्ड, फ्लेक्स, होर्डिंग और स्वागत द्वार लगाए जाते हैं, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आयोजन की जानकारी मिल सके तथा शहर में उत्सव का माहौल बन सके। लेकिन इस बार प्रचार-प्रसार की रफ्तार बेहद धीमी दिखाई दे रही है।


मेला से जुड़े ठेकेदारों और व्यवसायियों का कहना है कि प्रचार-प्रसार नहीं होने का सीधा असर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या पर पड़ सकता है। उनका मानना है कि किसी भी मेले की सफलता में प्रचार की बड़ी भूमिका होती है। यदि लोगों तक समय पर सूचना नहीं पहुंचेगी तो मेले की भव्यता और व्यवसाय दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि प्रशासनिक स्तर पर मेला की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर आवास, पेयजल, यातायात, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेला क्षेत्र को सजाने और व्यवस्थित करने का कार्य भी जारी है। इसके बावजूद शहर के अन्य हिस्सों में प्रचार सामग्री का अभाव लोगों को खटक रहा है।

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स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि मलमास मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राजगीर की अर्थव्यवस्था और पर्यटन से भी जुड़ा बड़ा अवसर है। मेले के दौरान हजारों छोटे दुकानदारों, होटल व्यवसायियों, वाहन चालकों और स्थानीय व्यापारियों को रोजगार मिलता है। ऐसे में यदि प्रचार-प्रसार कमजोर रहेगा तो इसका असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है।
लोगों का कहना है कि नगर परिषद और प्रशासन को अब युद्धस्तर पर प्रचार अभियान चलाना चाहिए। शहर के प्रवेश द्वारों, प्रमुख सड़कों और पर्यटन स्थलों पर आकर्षक होर्डिंग, फ्लेक्स, एलईडी स्क्रीन और स्वागत द्वार लगाए जाने चाहिए, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को मेले की भव्यता का एहसास हो सके।
— जनता की राय
संजय कुमार सिंह, मेला ठेकेदार
“मलमास मेला अंतरराष्ट्रीय पहचान वाला धार्मिक आयोजन है। ऐसे मेले के प्रचार-प्रसार में देरी ठीक नहीं है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों तक सूचना पहुंचाने के लिए शहर में जल्द से जल्द होर्डिंग, फ्लेक्स और स्वागत द्वार लगाए जाने चाहिए, ताकि मेले का माहौल बन सके।”
अशोक Kumar राय, मेला ठेकेदार
“मेला की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर अच्छी चल रही हैं, लेकिन प्रचार-प्रसार का अभाव साफ दिख रहा है। शहर में अब तक मलमास मेला का उत्साह दिखाई नहीं पड़ रहा है। समय रहते प्रचार सामग्री नहीं लगी तो इसका असर दुकानदारों, व्यवसायियों और मेला से जुड़े लोगों पर पड़ सकता है।”
डॉ. अनिल कुमार, वार्ड पार्षद
“राजगीर का मलमास मेला आस्था और संस्कृति का बड़ा केंद्र है। हर बार शहर को आकर्षक तरीके से सजाया जाता था, लेकिन इस बार अब तक वैसी तैयारी प्रचार के स्तर पर नहीं दिख रही है। प्रशासन को तत्काल शहर में बैनर, फ्लेक्स और सूचना बोर्ड लगाने की दिशा में पहल करनी चाहिए।”
सुधीर कुमार पटेल, पूर्व प्रखंड प्रमुख
“मलमास मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राजगीर की पहचान और पर्यटन से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। मेला शुरू होने में बहुत कम समय बचा है, फिर भी प्रचार-प्रसार नहीं होना चिंता का विषय है। इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं तक सही संदेश नहीं पहुंच पा रहा है।”

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