पटना (अपना नालंदा)। बिहार खेल विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंदर ने बुधवार को खेल विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान जिला खेल पदाधिकारियों (डीएसओ) एवं विभागीय अधिकारियों को नियमित मैदानी निरीक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि खेल मैदानों और परिसरों का दौरा केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि खेल व्यवस्था को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
डॉ. बी. राजेंदर ने निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रखंड स्तरीय खेल मैदान, आउटडोर स्टेडियम तथा जिला स्तरीय खेल भवन-सह-व्यायामशाला का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी नियमित रूप से मैदानों पर जाएंगे और स्थानीय खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों व नागरिकों से संवाद करेंगे, तभी खेल गतिविधियों को गंभीरता से लिया जाएगा। इससे जमीनी स्तर पर उत्पन्न समस्याओं की समय पर पहचान और समाधान संभव हो सकेगा।
बैठक में राज्य में खेल आधारभूत संरचना के विकास एवं उसके नियमित रख-रखाव को विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि केवल नए खेल परिसरों का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता और सतत रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक के दौरान जिला स्तर पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना योजना की भी समीक्षा की गई। डॉ. बी. राजेंदर ने बताया कि विभाग विभिन्न जिलों में विशेष खेलों पर आधारित उत्कृष्टता केंद्र विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके तहत किशनगंज में ताइक्वांडो, अरवल में कबड्डी तथा मधेपुरा में बैडमिंटन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाने की योजना है। प्रथम चरण में उपलब्ध खेल सुविधाओं का उपयोग करते हुए 6 से 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू किए जाएंगे।
अपर मुख्य सचिव ने एकलव्य प्रशिक्षण केंद्रों की प्रगति की समीक्षा करते हुए इसे विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने जिला खेल पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी एकलव्य केंद्रों में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छ पेयजल, शौचालय व्यवस्था तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
वर्तमान में राज्य में 29 एकलव्य केंद्र संचालित हैं, जहां 1250 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। विभाग मई माह के अंत तक 18 अतिरिक्त एकलव्य केंद्र शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जिससे अधिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण का अवसर मिल सकेगा।
इस अवसर पर बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा, “बिहार के युवाओं में खेल प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही अवसर और बेहतर सुविधाओं की है। एकलव्य केंद्रों का विस्तार और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना इसी दिशा में उठाए गए ठोस कदम हैं। हमारा संकल्प है कि बिहार का हर प्रतिभावान खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य का नाम रोशन करे।”
बैठक में डॉ. बी. राजेंदर ने बिहार लोक सेवा आयोग से खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया की भी जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि खेल पदाधिकारियों की भर्ती हेतु परीक्षाएं इसी वर्ष जनवरी माह में आयोजित की गई थीं। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि खेल प्रशासन को और अधिक सशक्त बनाया जा
जमीनी निगरानी, खेल आधारभूत संरचना और एकलव्य केंद्रों की गुणवत्ता पर खेल विभाग का विशेष जोर
Written by Sanjay Kumar
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