साक्षरता व्यक्ति को अधिकार, कर्तव्य और निर्णय की समझ देती है : प्रो. सुनीता सिन्हा

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। नालंदा कॉलेज के शिक्षाशास्त्र (बीएड) विभाग में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस समारोह का आयोजन उत्साह और धूमधाम के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नालंदा कॉलेज की प्राचार्या प्रो. सुनीता सिन्हा सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। समारोह के दौरान साक्षरता के महत्व, बदलते दौर में शिक्षा की भूमिका, डिजिटल साक्षरता और शिक्षक के दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया। साथ ही बीएड के एक सत्र के प्रशिक्षुओं को विदाई तथा नए सत्र के विद्यार्थियों का स्वागत किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नालंदा कॉलेज की प्राचार्या प्रो. सुनीता सिन्हा ने कहा कि साक्षरता सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम है। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक चेतना का स्मरण भी है, जो व्यक्ति को अपने अधिकारों को समझने, कर्तव्यों का निर्वहन करने और अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं लेने की शक्ति प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के विकास में शिक्षा और साक्षरता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब व्यक्ति शिक्षित और जागरूक होता है तो वह अपने अधिकारों एवं जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझता है। इससे समाज में सकारात्मक सोच विकसित होती है और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को गति मिलती है। उन्होंने बीएड प्रशिक्षुओं से शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज निर्माण का साधन बनाने का आह्वान किया।
साक्षरता शिक्षा की पहली सीढ़ी, लेकिन अंतिम लक्ष्य नहीं : प्रो. प्रभास कुमार
समारोह के विशिष्ट अतिथि थरथरी (भतहर) डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रो. प्रभास कुमार ने कहा कि साक्षरता शिक्षा की पहली सीढ़ी है, लेकिन शिक्षा का अंतिम लक्ष्य नहीं है। वास्तविक साक्षरता व्यक्ति के अंदर सोचने, प्रश्न करने, तर्क करने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल अक्षर ज्ञान होना पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति को अपने आसपास की परिस्थितियों को समझने, उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण करने और सही एवं गलत के बीच अंतर करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। उन्होंने भावी शिक्षकों से विद्यार्थियों में जिज्ञासा, तार्किक सोच और रचनात्मकता विकसित करने की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।
डिजिटल युग में सूचना की सत्यता समझना जरूरी : डॉ. ध्रुव कुमार
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीएड विभागाध्यक्ष सह पीपीयू सीनेट सदस्य डॉ. ध्रुव कुमार ने कहा कि आज के समय में साक्षरता का अर्थ काफी व्यापक हो गया है। डिजिटल युग में किसी सूचना को केवल पढ़ लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि सूचना सही है या भ्रामक, तथ्य क्या है और अफवाह क्या है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य साक्षरता और मीडिया साक्षरता भी पारंपरिक साक्षरता जितनी ही महत्वपूर्ण हो गई हैं। मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच विद्यार्थियों को सूचना के सही स्रोत की पहचान करना और उसका विवेकपूर्ण इस्तेमाल करना सीखना आवश्यक है।

डॉ. ध्रुव कुमार ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित ज्ञान देने के बजाय उन्हें जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार करें। शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करें।
प्रशिक्षुओं को दी गई विदाई, नए विद्यार्थियों का हुआ स्वागत
कार्यक्रम के दौरान बीएड सत्र 2024-26 के प्रशिक्षुओं को भावपूर्ण विदाई दी गई। वहीं सत्र 2026-28 के नए विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। वरिष्ठ प्रशिक्षुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कॉलेज एवं विभाग से जुड़ी अपनी यादों को सामने रखा। नए विद्यार्थियों को शिक्षण प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन, नियमितता और अध्ययन के प्रति गंभीर रहने की सलाह दी गई।
समारोह के माध्यम से नए प्रशिक्षुओं को यह संदेश दिया गया कि शिक्षक का कार्य केवल विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व एवं भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है।
उत्कृष्ट शिक्षकों को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित
समारोह में शिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट, समर्पित एवं कर्मठ भूमिका निभाने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव कुमार ने प्रो. सुनीता सिन्हा, प्रो. प्रभास कुमार, डॉ. ऊषा कुमारी, डॉ. अपर्णा, डॉ. कीर्ति स्वराज, डॉ. प्रशांत, डॉ. संगीता कुमारी एवं डॉ. अलाउद्दीन को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
इस दौरान शिक्षकों ने कहा कि शिक्षक सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का सम्मान नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका का सम्मान है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, अनुशासन बनाए रखने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षकों ने भी रखा अपना विचार
इस अवसर पर डॉ. ऊषा कुमारी, डॉ. अपर्णा, डॉ. कीर्ति स्वराज, डॉ. प्रशांत, डॉ. संगीता कुमारी एवं डॉ. अलाउद्दीन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने साक्षरता के महत्व, शिक्षक की भूमिका तथा विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
वक्ताओं ने कहा कि आज का विद्यार्थी तेजी से बदलती दुनिया का हिस्सा है। ऐसे में शिक्षकों को भी समय के साथ अपनी शिक्षण पद्धति में बदलाव लाना होगा। विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान, तकनीकी समझ, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना आवश्यक है।
विद्यार्थियों ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
समारोह में बीएड प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने साक्षरता एवं शिक्षा के महत्व से जुड़े विचारों को साझा किया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को भविष्य में बेहतर शिक्षक बनने के लिए निरंतर अध्ययन और आत्ममंथन करते रहने की सलाह दी।
कार्यक्रम का संचालन चांदनी कुमारी एवं रवि कुमार ने किया। समारोह को सफल बनाने में बीएड सत्र 2025-27 के अमित सागर, अंकित एवं अमरदीप कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों, शिक्षकों एवं प्रशिक्षुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
समारोह में मौजूद शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि साक्षरता को केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित न रखते हुए इसे जागरूकता, तार्किक सोच, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा जाएगा।

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