बाल श्रम के खिलाफ अभियान तेज, मुक्त कराए गए बच्चे को मिली तत्काल आर्थिक सहायता

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। श्रम संसाधन विभाग, बिहार के निर्देश पर जिले में बाल श्रम के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजगीर क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक बाल श्रमिक को कार्यस्थल से मुक्त कराया गया। बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चे को विभागीय प्रावधानों के तहत तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई गई, ताकि उसे और उसके परिवार को तत्काल आर्थिक सहयोग मिल सके।
श्रम विभाग की ओर से बाल श्रम की रोकथाम के साथ-साथ मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा और उनके अधिकारों की सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, राजगीर अभिषेक कुमार ने बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चे को विभाग द्वारा निर्धारित तत्काल सहायता राशि प्रदान की। इस दौरान बच्चे और उसके परिवार को बाल श्रम से होने वाले नुकसान तथा बच्चों के अधिकारों के संबंध में भी जानकारी दी गई।


श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने कहा कि बाल श्रम कानूनन अपराध है और बच्चों से काम कराने के बजाय उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर मिलना चाहिए। बच्चों का कम उम्र में श्रम में लगना उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है तथा उन्हें शिक्षा के अधिकार से भी वंचित करता है।
उन्होंने कहा कि श्रम संसाधन विभाग की ओर से बाल श्रम उन्मूलन को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान विभिन्न कार्यस्थलों का निरीक्षण कर बाल श्रमिकों की पहचान की जाती है। बाल श्रमिक पाए जाने पर उन्हें कार्यस्थल से मुक्त कराने के साथ संबंधित नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाती है। साथ ही मुक्त कराए गए बच्चों को उनके अधिकारों से जोड़ने और पुनर्वास की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि बाल श्रम समाप्त करने के लिए केवल सरकारी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। अभिभावकों, व्यवसायियों, दुकानदारों, प्रतिष्ठान संचालकों और आम लोगों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी बच्चे से उसकी कम उम्र में मजदूरी अथवा अन्य श्रम कार्य न कराया जाए।


श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अपने आसपास कोई बच्चा काम करता हुआ दिखाई देता है, तो इसकी सूचना संबंधित श्रम विभाग, प्रशासन अथवा सक्षम प्राधिकारी को दें। सूचना मिलने पर विभाग द्वारा मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और बच्चे को बाल श्रम से मुक्त कराने की पहल की जाएगी।
वहीं, आइडिया संस्थान के समन्वयक उज्ज्वल कुमार नेर कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल श्रम की रोकथाम के लिए प्रशासन एवं संबंधित विभाग गंभीरता से कार्य कर रहे हैं। बाल श्रम से मुक्त बच्चों को केवल कार्यस्थल से हटाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, शिक्षा से जोड़ना और उनके बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चे को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराए जाने से उसके परिवार को आर्थिक स्तर पर तत्काल राहत मिली है। विभाग की इस पहल से यह संदेश भी गया है कि बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
श्रम विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य जिले में बाल श्रम की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाना तथा प्रत्येक बच्चे को शिक्षा और सुरक्षित बचपन का अधिकार सुनिश्चित कराना है। विभाग ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सामूहिक प्रयास से ही बाल श्रम जैसी सामाजिक समस्या का पूरी तरह उन्मूलन संभव है।

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