अपसा शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षकों का बढ़ा मान, प्रो. के.सी. सिन्हा ने कहा- शिक्षक ही करते हैं राष्ट्र के भविष्य का निर्माण

Written by Sanjay Kumar

Published on:

पटना(अपना नालंदा)। अन-एडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन (अपसा), बिहार की ओर से रविवार को पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर, फ्रेजर रोड में 8वां अपसा शिक्षक सम्मान समारोह-2026 का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में प्रदेश के विभिन्न निजी विद्यालयों से जुड़े शिक्षकों, प्राचार्यों, विद्यालय संचालकों एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों और शिक्षाविदों को “अपसा शिक्षा रत्न” सम्मान प्रदान कर उनके योगदान को सम्मानित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात गणितज्ञ प्रो. के.सी. सिन्हा रहे। उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षकों की भूमिका को समाज और राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने का कार्य नहीं करते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, चरित्र और सोच को भी आकार देते हैं। एक बेहतर शिक्षक अपने विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
प्रो. सिन्हा ने कहा कि “शिक्षकों के सम्मान से शिक्षा का मान बढ़ता है।” समाज में शिक्षक का स्थान सदैव सम्मानजनक रहा है और शिक्षकों को सम्मानित करने से उनके भीतर नई ऊर्जा और जिम्मेदारी की भावना पैदा होती है। उन्होंने कहा कि आज के बदलते दौर में शिक्षा के क्षेत्र में भी लगातार परिवर्तन हो रहा है। ऐसे समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। शिक्षकों को विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान के साथ-साथ मानवीय मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी जोड़ना होगा।
समारोह में सम्मानित होने वाले शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के कार्यों की सराहना करते हुए वक्ताओं ने कहा कि निजी विद्यालयों के शिक्षक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अनेक शिक्षक विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। ऐसे शिक्षकों को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित किए जाने से न केवल उनका मनोबल बढ़ता है, बल्कि अन्य शिक्षकों को भी बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम के दौरान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, बदलते शैक्षणिक परिवेश और समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के सामने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई-नई चुनौतियां हैं। ऐसे में विद्यालयों को पारंपरिक शिक्षा के साथ तकनीकी एवं व्यावहारिक ज्ञान पर भी विशेष ध्यान देना होगा। विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करना समय की आवश्यकता है।
निजी विद्यालयों के संचालकों एवं प्राचार्यों ने शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आपसी सहयोग तथा अनुभवों के आदान-प्रदान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक के बीच बेहतर समन्वय से ही बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है।
समारोह में सम्मान कार्यक्रम के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी शानदार प्रस्तुति हुई। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों एवं कलाकारों ने गीत, संगीत और नृत्य सहित कई रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने समारोह में मौजूद अतिथियों एवं दर्शकों का मन मोह लिया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा के माध्यम से कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का माहौल बना दिया। अतिथियों ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सिटी बुक सेंटर, पटना (अमर सप्लायर्स) का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। आयोजकों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी संस्थानों, विद्यालय संचालकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समारोह में अपसा के पदाधिकारियों के अलावा विभिन्न निजी विद्यालयों के संचालक, प्राचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी एवं शिक्षा जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सम्मानित शिक्षकों और शिक्षाविदों में खासा उत्साह देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने कहा कि शिक्षकों के योगदान को पहचान देने और उन्हें सम्मानित करने की ऐसी पहल शिक्षा जगत के लिए सकारात्मक संदेश देती है।
अपसा की ओर से कहा गया कि संगठन का उद्देश्य निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के योगदान को उचित सम्मान देना तथा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना है। भविष्य में भी शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के सम्मान के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वालों को समाज के सामने पहचान मिल सके और नई पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के प्रयासों को और मजबूती मिले।

Leave a Comment