बावन बूटी को मिलेगी नई पहचान, डीएम उदिता सिंह ने पर्यटन और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ने की बनाई रणनीति

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। नालंदा की जिला पदाधिकारी उदिता सिंह ने शनिवार को बसवनबिगहा, बिहारशरीफ में आयोजित बावन बूटी कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में बुनकरों, शिल्पकारों, नाबार्ड के अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों के पदाधिकारी शामिल हुए। अतिथियों का स्वागत हरित पौधा और अंगवस्त्र भेंट कर किया गया।
अपने संबोधन में डीएम ने कहा कि नालंदा की प्रसिद्ध बावन बूटी हस्तशिल्प कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए प्रशासन पर्यटन स्थलों पर बिक्री एवं प्रदर्शन की स्थायी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक उत्पाद के साथ उसकी निर्माण प्रक्रिया, कारीगर की जानकारी, प्रयुक्त सामग्री और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि भी प्रदर्शित होनी चाहिए, ताकि खरीदार उससे भावनात्मक रूप से जुड़ सकें।


डीएम ने प्रत्येक उत्पाद पर क्यूआर (QR) कोड लगाने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे खरीदार उत्पाद से जुड़ी सभी जानकारियां आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक एवं वित्तीय सहयोग का भरोसा दिया।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने बताया कि जीआई (GI) टैग मिलने के बाद सभी बुनकरों को उससे जोड़ा जाएगा। साथ ही ऑनलाइन बिक्री और क्षेत्र में धागा उत्पादन इकाई स्थापित करने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।
कार्यक्रम में बुनकरों ने मार्केटिंग, स्थायी बाजार, प्रशिक्षण तथा सरकारी संस्थानों और पर्यटन स्थलों पर बावन बूटी उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने की मांग रखी। डीएम ने सभी व्यवहारिक सुझावों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

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