नवी मुंबई में कंटेनर की चपेट में आकर नालंदा के प्रवासी युवक की दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम; समाजसेवी ने मुआवजे की उठाई मांग

Written by Sanjay Kumar

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विजय प्रकाश उर्फ पिन्नू
नूरसराय (अपना नालंदा)। नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड अंतर्गत चौर बिगहा गांव के एक युवा प्रवासी मजदूर की महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) में ड्यूटी के दौरान दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। बुधवार को जैसे ही एम्बुलेंस से युवक का शव उसके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे गांव में मातम छा गया। परिजनों की चीख-पुकार और ग्रामीणों की नम आंखों ने माहौल को गमगीन बना दिया।
मृतक की पहचान चौर बिगहा निवासी किशोर प्रसाद के 19 वर्षीय पुत्र अमित कुमार के रूप में हुई है। वह परिवार के दो भाइयों में बड़ा था। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने के उद्देश्य से अमित लगभग एक माह पूर्व, 9 जून को रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र गया था। वहां वह नवी मुंबई स्थित जेएनपीटी में प्रवासी मजदूर के रूप में कार्यरत था।
परिजनों ने बताया कि 5 जुलाई की अहले सुबह लगभग साढ़े तीन बजे वह अपनी ड्यूटी पर तैनात था। इसी दौरान मालवाहक जहाज से कंटेनर उतारने का कार्य चल रहा था। अचानक एक भारी कंटेनर संतुलन बिगड़ने के कारण अमित के ऊपर गिर गया। कंटेनर की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद सहकर्मियों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन अत्यधिक चोट लगने के कारण उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
हादसे की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुधवार को एम्बुलेंस के माध्यम से शव को गांव लाया गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग पहुंचे तथा शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी।
परिजनों का कहना है कि अमित परिवार का सहारा बनने के लिए कम उम्र में ही रोजी-रोटी कमाने बाहर गया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उसकी असामयिक मौत से पूरे परिवार का भविष्य संकट में पड़ गया है।
बताया जा रहा है कि इस हादसे की खबर महाराष्ट्र के कई प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया माध्यमों में भी प्रमुखता से प्रकाशित और प्रसारित हुई है।
घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए चर्चित समाजसेवी अरविंद कुमार सिन्हा ने इसे अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारी है। उन्होंने जेएनपीटी प्रशासन एवं संबंधित कंपनी से मृतक के परिजनों को उचित आर्थिक मुआवजा, सरकारी सहायता तथा परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि पीड़ित परिवार को इस कठिन समय में कुछ राहत मिल सके।

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