सार्क देशों के पत्रकारों और लेखकों का नालंदा में चौथा दो अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा सम्मेलन अपनी भव्यता के साथ हुआ संपन्न

Written by Sanjay Kumar

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प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर ऑन का पत्रकार और लेखकों ने किया निरीक्षण और भ्रमण

संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)।04-05 जनवरी 2026 को सार्क जर्नलिस्ट फोरम इंडिया चेप्टर बिहार,नालंदा खुला विश्वविद्यालय,आम्रपाली कला साहित्य सम्मेलन एवं मानवाधिकार टुडे के तत्वावधान में बिहार का चौथा दो दिवसीय अंतराष्ट्रीय सम्मेलन कल 4 और 5 जनवरी को अपनी भव्यता लिए हुआ संपन्न।इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुये सिक्किम पूर्व राज्यपाल माननीय श्री गंगा प्रसाद ने अपने मूल्यांकन विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ज्ञान की इस ऐतिहासिक भूमि नालंदा ने अपनी ऐतिहासिक गरिमा को फिर से स्थापित करने में आप सभी सार्क देशों के पत्रकारों और लेखकों की भूमिका सराहनीय है। आप सभी पत्रकारों, लेखकों और साहित्यकारों का हम धन्यावाद देते है कि हमारे बिहार की भूमि में नए उर्जा का संचार करने के लिए पधारे हैं। सम्मेलन समारोह की अध्यक्षता बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ अनिल सुलभ ने अपने मातृभाषा और राष्ट्र भाषा
के व्यापक महत्व को बताया। वहीं मॉरिशस से पहुंची वहां के पूर्व उप प्रधान मंत्री की पत्नी,अंतराष्ट्रीय संस्कृति संवाहिका एवं सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ सरिता बुद्धु ने बिहार की धरती को अपना दूसरा घर बताते हुए कहा कि नालंदा की धरती के ज्ञान की चर्चा आज पूरी दुनिया में है और यही आकर्षण ने मुझे याद खींच लाया है। हम इस सम्मेलन में संयोजक,सार्क देशों में मानवाधिकार पत्रकारिता के संवाहक डॉ शशि भूषण कुमार जी ने लगातार बिहार में चौथी बार संस्कृति एवं मातृभाषा पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किया और मैं हर वर्ष खींची चली आती हू और यह मेरा बिहार आत्मीय लगाव बन गया है। इस उद्घाटन समारोह में पद्मश्री डॉ जे के सिंह,पद्मश्री बिमल जैन, थाईलैंड के डाक्टर पी सी चंद्रा, नेपाल से सार्क जर्नलिस्ट फोरम के अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष राजू लामा एवं बांग्लादेश से शार्क जर्नलिस्ट फॉर्म के अंतरराष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद अब्दुल रहमान,
,डॉ ब्रजनंदन कुमार सिन्हा ने भी अपने-अपने मूल्यांकन विचारों से समारोहों को प्रकाशित किया। इस समारोह उद्घाटन के बाद सभी अतिथियों ने सबसे पहले मानवाधिकार और पत्रकारिता पर आधारित कुल गीत को गाया। इस समारोहों सत्र में डॉ सरिता बुद्धू,पद्मश्री डॉ जे के सिंह, ,डॉ ब्रजनंदन कुमार सिन्हा एवं डॉ सुष्मिता पांडेय को लाइफ टाइम अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया। इस अलावा 21 व्यक्तित्वों को नालंदा इन्टरनेशनल अचीवर्स अवार्ड 2025 एवं 51 व्यक्तित्वों को बिहार गौरव अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया। इस समारोह के के अवसर पर प्रकाशित प्रधान सम्पादक डॉ शशि भूषण कुमार एवं प्रो. रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव “परिचय दास द्वारा संपादित पुस्तक “बिहार का गौरव:नालंदा एवं मातृभाषा नामक एवं भोजपुरी चित्रकार वंदना श्रीवास्तव की पुस्तक “भोजपुरी कला के बहाने ” का लोकार्पण किया गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत एवं बिहार की लोक संस्कृति एवं भाषा के उन्नयन हेतु “वैशाली अंतरराष्ट्रीय विद्यापीठ” के स्थापना की घोषणा का छवि चित्र का लोकार्पण भी सभी सम्मानित अतिथियों एवं अंतर्राष्ट्रीय अतिथियों के बौद्धिक सहमती एवं हस्ताक्षर के साथ किया गया। इस समारोह उद्घाटन सत्र में मुख्य वक़्त प्रोफेसर रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव एवं नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार नृपेन्द लाल श्रेष्ठ ने अपने-अपने व्याख्यान दिये। स्वागत भाषण समारोह के संयोजक एवं मानवाधिकार टुडे के संपादक
वरिष्ठ पत्रकार शशि भूषण कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ पंकज कुमार ने दिया।


“पत्रकारिता एवं मानवाधिकार एक वैश्विक चुनौती” विषय गोष्ठी के प्रथम वैचारिक सत्र का उद्घाटन सार्क जर्नलिस्ट फोरम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष राजू लामा, अध्यक्षता सार्क जर्नलिस्ट फोरम बिहार के अध्यक्ष एवं मानवाधिकार टुडे के सम्पादक डॉ शशि भूषण कुमार ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ अभय कुमार सिंह एवं अतिथि वक्तागण के रूप में नेपाल से पत्रकार नृपेन्द लाल श्रेष्ठ ,मोहम्मद सद्दाब,बंग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार मुस्ताक अहमद मुबारकी,
भारत से राजेश भट्ट एवं अभिजीत शर्मा हुये शामिल।वहीं श्रीलंका से वरिष्ठ पत्रकार और सार्क जर्नलिस्ट फोरम श्रीलंका के अध्यक्ष राहुल समंथा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किये। वहीं मंच संचालन कोलकाता से पहुंची चर्चित लेखिका डॉ उर्वशी श्रीवास्तव,धन्यवाद ज्ञापन दैनिक हिन्दुस्तान नालंदा के रिपोर्टर प्रमोद चंद्र झा और सत्र संयोजन मानवाधिकार टुडे के तकनीकी सम्पादक मुस्ताक कदरी ने किया। वही इस सत्र में गोल्ड मैन ऑफ इंडिया प्रेम सिंह को बिहार गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया l

” अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नालंदा विश्वविद्यालय का शैक्षणिक महत्व”
विषय गोष्ठी के दितीय वैचारिक सत्र का उद्घाटन सरस्वती विद्या मंदिर राजगीर के प्राचार्य और प्रखर वक्ता डॉ आनंद कुमार, अध्यक्षता नालंदा नव बिहार विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर और चर्चित लेखक
प्रोफेसर परिचय दास ने किया। विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ रजनीश कुमार,डॉ रामराम चौरसिया एवं अंकित द्विवेदी ने अपने- अपने व्याख्यान दिये।वहीं धन्यवाद ज्ञापन मानवाधिकार टुडे की समाचार वाचिका डॉ करुणा पीटर ने किया।

“बिहार की संस्कृति एवं मातृभाषा”
विषय तृतीय खुला सत्र का उद्घाटन
पटना विश्वविद्यालय,नालंदा विश्वविद्यालय एवं वीर कुंवर सिंह विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति विद्वान प्रो. के सी सिन्हा ने किया और विशिष्ठ अतिथि के रूप में औरंगाबाद के उप विकास अयुक्त सुमित कुमार शामिल हुये।
अध्यक्षता बज्जिका के चर्चित लेखक एवं विद्वान प्रोफेसर डॉ ब्रह्मदेव प्रसाद कार्यी ने किया। विशिष्ठ वक्ता के रूप में सा साइटिफिक रिसर्च ऑर्गनाइजेशन सिंडेटा USA के कुमार विजय विकास अंवष्टा एवं डॉ अरुण कुमार निराला ने शानदार व्याख्यान दिए एवं डॉ उर्वशी श्रीवास्तव, गोविंद वल्लभ, ओंकार प्रसाद सिंह, डॉ रजनी प्रभा,डॉ करुणा कमल पीटर,डॉ रेणु शर्मा,अंकित दिवेदी,एम एस सुषमा, डॉ चरणजीत वर्मा ने अपनी-अपनी कविताओं के माध्यम से प्रस्तुति दी। संध्या में लोक संस्कृति पर आधारित साँस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया जिसमें स्थानीय कलाकारों के अलावा पश्चिम बंगाल के कलाकारों एवं सिने अभिनेता राजन कुमार की टीम द्वारा शानदार प्रस्तुति हुईl वही सम्मेलन के दूसरे दिन सार्क देशों के पत्रकार एवं लेखक के साथ-साथ मॉरीशस से पहुंची मॉरीशस की चर्चित लेखिका डॉक्टर संहिता बुद्धू जी ने नालंदा की ऐतिहासिक धरोहर प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का भ्रमण किया और निरीक्षण किया और देखने के बाद कहा कि बाकी में यह दुनिया की बेहतरीन और बेमिसाल विश्वविद्यालय रही होगी जो दुनिया को ज्ञान प्रदान करने में अपनी अहम भूमिका अदा की होगी l साथ में भ्रमण कर रहे हैं नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ अभय कुमार सिंह ने कहा कि हमारे लिए यह बहुत ही खुशी की बात है की सार्क देशों के पत्रकार और लेखक हमारे विश्वविद्यालय के साथ-साथ प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय काव्य भ्रमण किया और इस बात के लिए सभी लोगों को उन्होंने बधाई और शुभकामनाएं दी l साथ ही सर जर्नलिस्ट फॉर्म बिहार के अध्यक्ष डॉ शशि भूषण कुमार ने कहा की हमारे लिए भी यह ऐतिहासिक सम्मेलन और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों का अवलोकन और निरीक्षण हमारे पत्रकार बंधु के करने से बिहार की विरासत पर अपनी अपनी खबरों में और साथ ही लिखो में सभी जिक्र करेंगेl

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