पटना (अपना नालंदा)। बिहार ललित कला अकादमी, पटना में 3 अप्रैल से आयोजित तीन दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी “बिहार की लोक कलाएं” में मिथिला के कलाकार मृणाल सिंह की कृतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस प्रदर्शनी में मधुबनी जिले के मूल निवासी कलाकार मृणाल सिंह की “महाकाली” और “बटुक भैरव” विषय पर आधारित चित्रकलाओं की विशेष प्रस्तुति की गई।
कलाजगत में मृणाल सिंह अपनी विशिष्ट मिथिला कचनी शैली के लिए जाने जाते हैं। उनकी कला में सूक्ष्म रेखाओं और एकल रंग के प्रयोग की खास पहचान है, जो उन्हें अन्य मिथिला कलाकारों से अलग बनाती है। अपनी इस अनूठी शैली के माध्यम से उन्होंने पंथ उपासना पद्धति में महाकाली और भैरव की आराधना की महत्ता को चित्रों में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

कलाकार की कृतियों में पारंपरिक मिथिला कला की गहराई और आध्यात्मिक भाव स्पष्ट रूप से झलकते हैं। उनकी सूक्ष्म रेखांकन शैली और विषय चयन ने प्रदर्शनी में आने वाले कला प्रेमियों और दर्शकों को खासा प्रभावित किया।
प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में आमंत्रित अतिथियों में पद्मश्री सम्मानित कलाकार श्याम शर्मा तथा कला एवं शिल्प महाविद्यालय, पटना की प्रधानाध्यापिका डॉ. राखी कुमारी शामिल थीं। दोनों अतिथियों ने मृणाल सिंह की कचनी शैली की सराहना करते हुए इसे मिथिला चित्रकला की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
इस प्रदर्शनी के माध्यम से बिहार की लोक कलाओं और मिथिला चित्रकला की समृद्ध परंपरा को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।







