राजेश कुमार गौतम
नालंदा (अपना नालंदा)।एक ओर बिहार सरकार ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी राजगीर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजगीर का मुख्य बस स्टैंड बदहाली, गंदगी और कीचड़ में डूबा हुआ नजर आ रहा है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि सरकार के पर्यटन विकास के दावों पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
बीते कई महीनों से राजगीर बस स्टैंड की हालत लगातार खराब बनी हुई है। हल्की बारिश होते ही पूरा परिसर कीचड़ में तब्दील हो जाता है। जगह-जगह पानी जमा रहने से यात्रियों को बस तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। न तो समुचित जलनिकासी की व्यवस्था है और न ही फर्श का पक्कीकरण किया गया है। परिणामस्वरूप यात्रियों को कीचड़ में फिसलते हुए बस पकड़नी पड़ रही है।
इन दिनों पर्यटन सीजन अपने चरम पर है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक राजगीर पहुंच रहे हैं। बस स्टैंड ही वह पहला स्थल है, जहां से सैलानी रोपवे, विश्व शांति स्तूप, जू सफारी, नेचर सफारी, गर्म कुंड, घोड़ा कटोरा और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों की ओर रवाना होते हैं। ऐसे में बस स्टैंड की यह दुर्दशा पर्यटकों पर बेहद नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। कई पर्यटकों का कहना है कि कीचड़ में चलते हुए उनके कपड़े और जूते खराब हो जाते हैं, जिससे उनकी यात्रा का अनुभव खराब हो रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह दृश्य मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नालंदा और राजगीर के विकास को लेकर दिखाई जा रही प्रतिबद्धता पर सीधा सवाल खड़ा करता है। बस स्टैंड की बदहाली देखकर कई पर्यटक निराश और नाराज नजर आते हैं, जो यहां से गलत संदेश लेकर लौटते हैं। इससे न केवल राजगीर, बल्कि पूरे बिहार की छवि देश-विदेश में प्रभावित हो रही है।

गौरतलब है कि वर्तमान में बिहार सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री एवं नालंदा के विधायक श्रवण कुमार हैं। इसके बावजूद राजगीर जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के बस स्टैंड की उपेक्षा होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। नगर परिषद राजगीर की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी न तो नियमित निरीक्षण करते हैं और न ही सफाई व मरम्मत को लेकर कोई ठोस कदम उठा रहे हैं।
नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही बस स्टैंड की सफाई, समतलीकरण, जलनिकासी और पक्की व्यवस्था नहीं की गई, तो इसका सीधा असर पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर पड़ेगा। लोगों ने नगर परिषद, जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि राजगीर बस स्टैंड को पर्यटन के अनुरूप सुव्यवस्थित किया जाए, ताकि इस ऐतिहासिक नगरी की गरिमा और पहचान बनी रह सके।





