ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने किसानों को दी नई तकनीक अपनाने की सलाह

Written by Sanjay Kumar

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विजय प्रकाश उर्फ पिन्नु
नूरसराय (अपना नालंदा)।प्रखंड कार्यालय परिसर, नूरसराय में गुरुवार को खरीफ महाअभियान 2025 का भव्य शुभारंभ ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, जदयू के वरिष्ठ नेता राजेन्द्र प्रसाद और जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर मंत्री श्रवण कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में समेकित कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) अपनाना जरूरी हो गया है। किसान अब केवल खेती तक सीमित न रहें, बल्कि मछली पालन, गाय पालन, बकरी पालन और बतख पालन जैसी गतिविधियाँ भी अपनाएं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो और जीवन खुशहाल बने।

मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार किसानों की भलाई के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे कम लागत में बेहतर उत्पादन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पहले सिंचाई के लिए डीजल महंगा पड़ता था, लेकिन अब बिजली से सिंचाई सस्ती और सुलभ हो गई है।

उन्होंने किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के साथ आधुनिक तकनीकों से खेती करने की अपील की। साथ ही यह भी बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में वर्ष 2005 से किसानों को अनुदानित दरों पर कृषि यंत्र, खाद और बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।

मंच का संचालन करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने किसानों को बीजों के उपचार और वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे कीट-व्याधियों की संभावना कम होती है और फसल का उत्पादन बेहतर होता है।

इस मौके पर उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में बीडीओ जियाउल हक, प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामदेव पासवान, प्रखंड प्रमुख रेखा देवी, आत्मा अध्यक्ष आशुतोष कुमार, कला-संस्कृति एवं खेल प्रकोष्ठ के महासचिव अमन कुमार, जदयू के युवा अध्यक्ष शुभम कुमार, जदयू नेता सुधीर कुमार, विक्की कुमार, मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष एवं पपरनौसा पंचायत के मुखिया अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू मुखिया, डॉ. सुनील दत्त, कृषि समन्वयक अजय पटेल, कृषि सलाहकार संजीव कुमार, विक्की कुमार सिंह, महेंद्र कुमार वर्मा, प्रीति कुमारी, महेश प्रसाद, श्रवण चौधरी समेत बड़ी संख्या में किसान और जनप्रतिनिधि शामिल थे।

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