सरस्वती विद्या मंदिर, हसनपुर में ज्ञानोत्सव के रूप में मनाया गया राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस

Written by Subhash Rajak

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संजय कुमार
बिहारशरीफ(अपना नालंदा)। नालंदा के पु. त. ज. म. सरस्वती विद्या मंदिर, हसनपुर, राजगीर में मंगलवार को राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. राणा पुरुषोत्तम कुमार सिंह, प्रो. (डॉ.) सैय्यद शाह हसीन अहमद एवं श्रीमती आभा सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
विद्यालय के सचिव प्रो. राणा पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने कहा कि पुस्तकालय समाज का मेरुदंड है। भारत में पुस्तकालय की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। नालंदा विश्वविद्यालय में नौ मंजिला तीन पुस्तकालय हुआ करते थे, जो सभ्यता और संस्कृति की पहचान थे। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय की स्थापना में उनका योगदान रहा है और वे इसके विकास में आगे भी सहयोग करते रहेंगे।
प्रो. हसीन अहमद ने बताया कि आज ही के दिन पुस्तकालय विज्ञान के जनक एस.आर. रंगनाथन का जन्म हुआ था, जिनकी स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय अध्ययन का केंद्र होता है। इंटरनेट पर बहुत सी जानकारियाँ उपलब्ध हैं, लेकिन वे हमेशा स्पष्ट और सही नहीं होतीं। इसलिए पुस्तकालय का कोई विकल्प न पहले था, न आज है और न भविष्य में होगा। पुस्तकालय पढ़ाई का वातावरण तैयार करता है और ज्ञान को बढ़ावा देता है।
जवाहर नवोदय विद्यालय की पुस्तकालयाध्यक्ष श्रीमती आभा सिन्हा ने कहा कि पुस्तकालय को आधुनिक समय के अनुरूप डिजिटल बनाने की आवश्यकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स की मदद से पुस्तकालय को और उन्नत किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों के स्क्रीन टाइम पर भी चिंता व्यक्त करते हुए इसके लिए समय-सीमा तय करने की आवश्यकता बताई।
अंत में विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य श्री रामजी प्रसाद सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में विद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष कुमार प्रिंस, अभयकांत पोद्दार, गोपाल जी राय सहित अन्य आचार्य, दीदीजी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।

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