संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)।नालंदा विश्वविद्यालय अपने द्वितीय दीक्षांत समारोह (समावर्तन समारोह) 2026 की तैयारियों में व्यापक स्तर पर जुटा हुआ है, जिसमें भारत की राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगी।
आगामी दीक्षांत समारोह के प्रमुख आकर्षणों में ‘सहभागिता संवाद’ पहल के अंतर्गत संकल्पित और संयोजित ‘सहभागिता प्रदर्शनी’ विशेष रूप से उल्लेखनीय होगी। विश्वविद्यालय की संवाद, समावेशिता और सहभागी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रतिबिंबित करती यह प्रदर्शनी विभिन्न विषयगत स्टॉलों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति देगी।
इन सुविचारित प्रदर्शनों के जरिए, यह प्रदर्शनी नालंदा विश्वविद्यालय के आसपास के गांवों के साथ उसके गहरे और जीवंत जुड़ाव को रेखांकित करेगी, जिसमें महिलाओं, किसानों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और समुदाय के अन्य सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई सहभागिता’ पहल लगातार कौशल विकास कार्यक्रम चला रही है, स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बना रही है और सतत विकास लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर लागू करने पर काम कर रही है, जिससे जमीनी स्तर पर सबको साथ लेकर विकास को बढ़ावा मिल रहा है।

प्रदर्शनी में हस्तनिर्मित उत्पादों, आजीविका में हुए सकारात्मक परिवर्तनों के दृश्य दस्तावेजों और संकाय तथा विद्यार्थियों के शोध निष्कर्षों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नालंदा विश्वविद्यालय के विद्यार्थी आसपास के गांवों के सांस्कृतिक मानचित्रण पर अपने उस कार्य का प्रस्तुतीकरण करेंगे, जिसे व्यापक सराहना और महत्वपूर्ण पहचान मिली है। यह कार्य क्षेत्र की समृद्ध विरासत को प्रभावी ढंग से उभारते हुए नालंदा की सभ्यतागत महत्ता को वैश्विक सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में सुदृढ़ रूप से स्थापित करने में योगदान दे रहा है। विद्यार्थी पारंपरिक ‘अहर-पाइन’ जल प्रबंधन प्रणाली का भी प्रस्तुतीकरण करेंगे, जिसने विश्वविद्यालय के नेट-जीरो परिसर में सतत जल संरक्षण की अवधारणा को प्रेरित किया है। साथ ही, यह चयनित समुदाय प्रतिनिधियों को राष्ट्रपति के साथ संवाद का एक विशिष्ट अवसर भी प्रदान करेगी।
विश्वविद्यालय परिसर में, आयोजन से सम्बंधित, सिविल और सौंदर्यीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। साथ ही, जिला प्रशासन के साथ समन्वय में नियमित सुरक्षा समीक्षा बैठकों के माध्यम से कार्यक्रम की सुचारु एवं गरिमामय व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।







