हरनौत (अपना नालंदा)। स्थानीय बाजार स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) हरनौत में मंगलवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. एस.के. पाठक का दौरा हुआ। उन्होंने करीब साढ़े तीन घंटे तक केंद्र में रुककर कार्यालयों, प्रयोगशालाओं, परिसर में स्थापित विभिन्न डेमो यूनिट तथा खेतों में लगी फसलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर केंद्र की गतिविधियों, उपलब्ध संसाधनों तथा किसानों के लिए संचालित कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की।
डॉ. पाठक ने केंद्र पर संचालित समेकित कृषि जीविकोपार्जन विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को विभिन्न कृषि सिद्धांतों एवं आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक व्यावहारिक और किसानोन्मुखी बनाया जाए, ताकि इसका सीधा लाभ ग्रामीणों को मिल सके। इस अवसर पर केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. सीमा कुमारी भी मौजूद थीं।

निरीक्षण के दौरान डॉ. पाठक ने मशरूम उत्पादन, स्पॉन उत्पादन इकाई, बकरी पालन, मत्स्य पालन, प्राकृतिक खेती, अजोला उत्पादन, पोषण वाटिका, क्राफ्ट कैफेटेरिया, जैव अपघटक कंपोस्ट, पौधा प्रबंधन, बायोचार तथा वर्मी कंपोस्ट यूनिट का अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित वैज्ञानिकों को इन डेमो यूनिटों को व्यवस्थित एवं आकर्षक ढंग से सजाने तथा किसानों के लिए मॉडल के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया।

यह उल्लेखनीय है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर (पूर्व में राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत) के अधीन यह केवीके आता है और डॉ. एस.के. पाठक का यह पहला दौरा था। उन्होंने केंद्र की विभिन्न समस्याओं को भी नजदीक से देखा। करीब 25 एकड़ में फैले इस परिसर में किसान घर, प्रशासनिक भवन, गोदाम, शेड, बीज प्रसंस्करण इकाई, ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन सहित अनेक संरचनाएं मौजूद हैं। प्रशासनिक सह कृषक भवन की आधारशिला 26 दिसंबर 1999 को तत्कालीन कृषि मंत्री नीतीश कुमार ने रखी थी और 12 अप्रैल 2003 को तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार द्वारा इसका उद्घाटन किया गया था।
वर्तमान में परिसर की स्थिति जर्जर बताई गई। चारदीवारी क्षतिग्रस्त है तथा नगर पंचायत के कूड़ा-कचरा एवं नालियों के पानी के कारण सालभर जलजमाव की समस्या बनी रहती है। इस पर डॉ. पाठक ने कहा कि केंद्र के पास अपनी अलग फंडिंग एजेंसी नहीं है और इसका समाधान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली स्तर से किया जाएगा।

प्रशासनिक भवन के प्रशिक्षण कक्ष में जिले की 25 जीविका दीदियों को पांच दिवसीय समेकित कृषि जीविकोपार्जन विषय पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसका दूसरा दिन भी जारी था। इसमें पशुपालन, जैविक खेती, मुर्गी पालन, वर्मी कंपोस्ट, मत्स्य पालन के साथ-साथ सब्जी एवं फल उत्पादन की तकनीकी जानकारी दी जा रही है। डॉ. पाठक ने योजनाओं एवं तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेती का क्षेत्रफल हेक्टेयर या डेसीमल में दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि समन्वय बेहतर हो सके।
मौके पर मृदा विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ. उमेश नारायण, गृह विज्ञान की वैज्ञानिक डॉ. ज्योति सिन्हा, पौधा संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. उदय प्रकाश नारायण, पशु एवं चिकित्सा विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ. विद्या शंकर सिन्हा, फार्म मैनेजर दीपक, सहायक रवि मोहन, विक्की, अभय, बसंत, राकेश सहित अन्य कर्मी उपस्थित रहे।







