आरटीई उल्लंघन पर सख्त हुए डीएम, निजी विद्यालयों को तत्काल चेतावनी

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार,बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। शुक्रवार को नालंदा जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के उल्लंघन का एक गंभीर मामला सामने आया, जिसे जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने अत्यंत संवेदनशीलता और तत्परता के साथ संज्ञान में लिया। बिहारशरीफ शहर के एक निजी विद्यालय द्वारा आरटीई के अंतर्गत नामांकित एक छात्रा से अवैध रूप से शुल्क की मांग किए जाने की शिकायत लेकर छात्रा अपने दादाजी के साथ जिला पदाधिकारी के पास पहुंची थी।
छात्रा ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उसका नामांकन आरटीई के प्रावधानों के तहत एक निजी विद्यालय में हुआ है और वर्तमान में वह सातवीं कक्षा में अध्ययनरत है। इसके बावजूद विद्यालय प्रबंधन द्वारा बार-बार उससे फीस की मांग की जा रही है। फीस नहीं देने की स्थिति में छात्रा को विद्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने से रोका जाता है, पढ़ाई में बाधा उत्पन्न की जाती है तथा उसके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है। इस व्यवहार का छात्रा के मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और वह हीन भावना की शिकार होती दिखाई दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पदाधिकारी ने तत्काल जिला शिक्षा पदाधिकारी, नालंदा तथा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा), नालंदा को अपने कार्यालय में तलब किया और निर्देश दिया कि इस पूरे प्रकरण की अविलंब जांच कर समुचित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिला पदाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि संबंधित छात्रा तत्काल प्रभाव से विद्यालय जाना प्रारंभ करे तथा विद्यालय परिसर में उसे किसी भी प्रकार की परेशानी, मानसिक दबाव या भेदभाव का सामना न करना पड़े। इसके लिए विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी तय की जाए और नियमित अनुश्रवण किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

यह उल्लेखनीय है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2011 के तहत निजी विद्यालयों में नामांकित छात्र-छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा के साथ-साथ विद्यालय में उपलब्ध सभी सुविधाएं प्रदान की जानी अनिवार्य हैं। इसके बदले सरकार संबंधित विद्यालयों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि आरटीई के अंतर्गत नामांकित बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता और उन्हें सामान्य विद्यार्थियों के समान सभी अधिकार प्राप्त होंगे।
इस प्रकार के मामलों के सामने आने से यह आशंका भी उत्पन्न होती है कि कुछ निजी विद्यालय आरटीई के तहत नामांकित विद्यार्थियों से अवैध रूप से शुल्क वसूलने के साथ-साथ सरकार से प्रतिपूर्ति राशि का भी दावा कर रहे हैं, जो गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता की श्रेणी में आता है।
इसी क्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि जिले के सभी निजी विद्यालयों की एक आपात बैठक बुलाकर उन्हें आरटीई अधिनियम के प्रावधानों का अक्षरशः पालन करने के लिए निर्देशित करें। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि आरटीई के अंतर्गत नामांकित किसी भी छात्र या छात्रा को किसी प्रकार की परेशानी न हो। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में उक्त छात्रा की शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए और इस मामले की सतत निगरानी की जाएगी।

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