निजी विद्यालयों की समस्याओं पर चर्चा, भारतीय स्वतंत्र शिक्षण संघ की प्रतिनिधि सभा संपन्न

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। भारतीय स्वतंत्र शिक्षण संघ की जिला शाखा नालंदा की प्रतिनिधि सभा का आयोजन रविवार को किया गया। इस प्रतिनिधि सभा में जिले भर के निजी विद्यालयों से जुड़े पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा शिक्षा से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सभा की शुरुआत राष्ट्रीय नववर्ष शाके 1948 शालिवाहन और बिहार दिवस की शुभकामनाओं के आदान-प्रदान के साथ की गई। इसके बाद संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने शिक्षा व्यवस्था तथा निजी विद्यालयों से जुड़ी समस्याओं पर अपने विचार रखे।
सभा में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आगामी 29 मार्च 2026 को कर्पूरी भवन (टाउन हॉल), बिहारशरीफ में संगठन की सत्रांत सभा आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम में जिले के सभी निजी विद्यालयों के संचालकों और प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधान पर व्यापक स्तर पर चर्चा की जा सके।
प्रतिनिधि सभा में जिला कार्यकारिणी के साथ-साथ जिले के विभिन्न प्रखंडों और प्रक्षेत्रों से आए कार्यकारिणी सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में निजी विद्यालयों की समस्याओं की समीक्षा करते हुए संगठन की ओर से जिला शिक्षा विभाग से कई महत्वपूर्ण मांगें की गईं। संगठन ने मांग की कि सभी पूर्व से प्रस्वीकृत विद्यालयों का शीघ्र नवीनीकरण किया जाए तथा जिन विद्यालयों को अब तक यूडायस कोड प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें अविलंब यूडायस उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही ज्ञानदीप योजना के अंतर्गत नामांकित और निःशुल्क अध्ययनरत बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान पूर्व की बकाया राशि सहित अद्यतन रूप से करने की भी मांग की गई।


समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि जिला शिक्षा विभाग के पास पूर्व से प्रस्वीकृत निजी विद्यालयों की अद्यतन सूची उपलब्ध नहीं है। जानकारी साझा करने के लिए वर्तमान में पांच व्हाट्सएप समूह बनाए गए हैं, जिनमें से चार समूहों को समाप्त कर एक ही अद्यतन समूह बनाए जाने की आवश्यकता बताई गई, ताकि सभी विद्यालयों को सही और समय पर सूचना मिल सके।
प्रतिनिधि सभा में यह भी चर्चा हुई कि शिक्षा विभाग के पास ऐसी कोई स्पष्ट सूची नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि कोरोना काल के दौरान कितने निजी विद्यालय बंद हो गए और कितने विद्यालय वर्तमान में बिना यूडायस के संचालित हो रहे हैं। कई विद्यालय ऐसे भी हैं, जो बिना प्रस्वीकृति के चल रहे हैं। ऐसे विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के नामांकन के समय पेन नंबर और ट्रांसफर सर्टिफिकेट से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं।
बैठक में यह भी कहा गया कि जब यूडायस डेटा भरने की प्रक्रिया शुरू होती है, तब वर्ग प्रथम से ऊपर के बच्चों का डाटा भरने का अधिकार निजी विद्यालयों को नहीं मिलता। कई विद्यालयों के पास यूडायस कोड नहीं होने के कारण उन्हें बार-बार प्रखंड शिक्षा कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे विद्यालय संचालकों और शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


इसके अलावा प्रतिपूर्ति राशि की जांच प्रक्रिया में भी काफी देरी हो रही है। बताया गया कि वर्तमान समय तक मात्र 167 विद्यालयों की ही जांच पूरी हो सकी है, जबकि जिले में इससे कहीं अधिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। प्रस्वीकृति नवीनीकरण की जांच में लगाए गए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों के स्तर पर भी एकरूपता का अभाव देखा गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिला शिक्षा विभाग की ओर से जांच के संबंध में कोई स्पष्ट लिखित निर्देश प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को नहीं दिया गया है।
सभा में यह भी कहा गया कि सरकार का जन्म पंजीकरण कार्यालय भी पूरी तरह सक्रिय नहीं है। इसके कारण जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अभिभावकों को बार-बार नए निर्देशों का पालन करना पड़ता है। प्रतिनिधियों ने कहा कि इस व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है, ताकि बच्चों के आधार कार्ड में जन्मतिथि सही दर्ज हो सके और आगे की पढ़ाई में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
प्रतिनिधि सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि जिले में संचालित सभी निजी विद्यालयों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए संगठन के प्रतिनिधि सभी विद्यालय संचालकों से संपर्क करेंगे। उद्देश्य यह है कि निजी विद्यालयों की सामान्य ट्यूशन फीस के भुगतान में होने वाली अनियमितताओं को रोका जा सके और विद्यालयों की व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।
इसके साथ ही यह भी मांग उठाई गई कि सरकारी विद्यालयों में निजी विद्यालयों के छात्रों का नामांकन संबंधित विद्यालय के ट्रांसफर सर्टिफिकेट के बिना नहीं लिया जाए। ऐसा होने से निजी विद्यालयों को आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

सभा को संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भारत मानस, जिलाध्यक्ष मो. जाहिद और जिला उपाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने संबोधित किया। इसके अलावा जिला कार्यकारिणी से अरविंद प्रसाद, रंजीत कुमार, अमित कुमार और विकास कुमार ने भी अपने विचार रखे।
प्रखंड और प्रक्षेत्र स्तर से आए प्रतिनिधियों में निशिकांत प्रसाद, ब्रजेश कुमार, नरेश प्रसाद, सुशांत कुमार विमल, कुमार चंद्र प्रकाश, करण राज, सागर कुमार, राजीव कुमार, स्मित बब्बर, जितेंद्र कुमार, सुनील कुमार, धर्मेंद्र कुमार, सुजीत कुमार, गोपाल कुमार, विनय कुमार, दीनदयाल सिंह, रंजीत कुमार, मो. इस्माइल अली, नितेश कुमार, अवधेश प्रसाद, राकेश कुमार, सत्येंद्र प्रसाद सिंह, राम प्रकाश कुमार, तरुण कुमार, कुमार पंकज, विकास कुमार, राजीव रंजन कुमार, अखिलेश प्रसाद, अभिषेक कुमार, सौरभ रंजन, अरुण कुमार सिंह और रेखा भारती सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
सभी वक्ताओं ने सामूहिक निर्णय के तहत आगामी सत्रांत सभा को सफल बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में संगठन की संरक्षिका श्रीमती रेखा भारती ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसके साथ प्रतिनिधि सभा की कार्यवाही का समापन किया गया।

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