पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़ती पकड़, वोट प्रतिशत से बदला सियासी गणित

Written by Sanjay Kumar

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी आंकड़े केवल जीत और हार का संकेत नहीं देते, बल्कि वे राज्य के बदलते राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों की कहानी भी बयान करते हैं। वर्ष 2019 से 2024 तक के चुनावी आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की है। यह मजबूती केवल सीटों की संख्या में वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि वोट प्रतिशत और संगठनात्मक विस्तार में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
वरिष्ठ पत्रकार चंदन चौरसिया के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भाजपा की असली ताकत सिर्फ सीटों में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि वोट प्रतिशत में स्थायित्व और लगातार विस्तार है। यही कारण है कि पार्टी धीरे-धीरे राज्य की राजनीति में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरती गई है।
2019 का लोकसभा चुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस चुनाव में पार्टी ने राज्य के कई क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कड़ी चुनौती दी। विधानसभा सेगमेंट के आधार पर भाजपा 56 सीटों पर पहले स्थान पर रही। यह संकेत था कि पार्टी ने राज्य में अपनी मजबूत नींव तैयार कर ली है। हालांकि उस समय 50 प्रतिशत से अधिक वोट भाजपा को सीमित सीटों पर ही मिले थे, जिससे यह स्पष्ट था कि आगे और विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है।
इसके बाद 2021 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए संगठनात्मक मजबूती की परीक्षा साबित हुआ। इस चुनाव में पार्टी ने 77 सीटों पर जीत दर्ज की और करीब 201 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही। इसका मतलब यह था कि भाजपा लगभग हर क्षेत्र में मजबूत प्रतिस्पर्धा दे रही थी। इस चुनाव में भाजपा को कई सीटों पर 45 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जिससे यह संकेत मिला कि उसका कोर वोट बैंक तेजी से मजबूत हो रहा है।
2019 से 2024 के बीच भाजपा के वोट प्रतिशत में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। जहां 2019 में पार्टी को सीमित सीटों पर 50 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 90 सीटों तक पहुंच गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भाजपा उन क्षेत्रों में भी मजबूत हुई, जहां पहले वह केवल प्रतिस्पर्धा की स्थिति में थी।
2024 के लोकसभा चुनाव के विधानसभा सेगमेंट के विश्लेषण से पता चलता है कि भाजपा ने 146 सीटों पर 40 प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त किए, जबकि 90 सीटों पर वह पहले स्थान पर रही। इसके अलावा 177 सीटों पर पार्टी दूसरे स्थान पर रही। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भाजपा अब पश्चिम बंगाल में एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी है।
इन चुनावी परिणामों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब धीरे-धीरे द्विध्रुवीय होती जा रही है। राज्य में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है, जबकि कांग्रेस और वाम दलों का प्रभाव लगातार सीमित होता गया है।
चंदन चौरसिया के अनुसार, भाजपा की रणनीति का सबसे बड़ा पहलू यह है कि पार्टी हर चुनाव से सीखती है और अगले चुनाव में उसे लागू करती है। यही कारण है कि पश्चिम बंगाल में उसका संगठन बूथ स्तर तक मजबूत हुआ है और नए सामाजिक समूहों तथा युवा मतदाताओं के बीच भी उसकी पकड़ बढ़ी है।
कुल मिलाकर 2019 से 2024 तक का चुनावी सफर पश्चिम बंगाल में भाजपा के निरंतर विस्तार और रणनीतिक मजबूती की कहानी को दर्शाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि टीएमसी के मजबूत गढ़ में भाजपा की यह चुनौती किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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