संजय कुमार,बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। नए श्रम कानूनों के विरोध में 12 फरवरी को देशभर में सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है। इस हड़ताल को बैंकिंग, बीमा, कोयला, परिवहन सहित कई क्षेत्रों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में बैंक ऑफ इंडिया एम्प्लाई यूनियन के महासचिव प्रफुल्ल कुमार ने नए श्रम कानूनों को कर्मचारी विरोधी बताते हुए कड़ा विरोध जताया।
प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि नए श्रम कानून लागू होने से बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों की संगठित सौदेबाजी शक्ति गंभीर रूप से कमजोर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले हड़ताल की सूचना 14 दिन पूर्व देनी होती थी, जिसे अब बढ़ाकर 60 दिन कर दिया गया है। इस लंबी अवधि के दौरान यदि प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों का मनमाना स्थानांतरण कर दिया जाता है, तो उन्हें बिना वेतन लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेड यूनियन की मान्यता के लिए सदस्य संख्या की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर दी गई है, जिससे छोटे और उभरते संगठनों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा नए कानूनों में हड़ताल के लिए अनिवार्य सहमति, शिफ्ट-वाइज कार्य व्यवस्था तथा रात्रिकालीन ड्यूटी जैसी शर्तें जोड़ी गई हैं, जिससे विशेष रूप से बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
प्रफुल्ल कुमार ने स्पष्ट किया कि मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह हड़ताल बेहद जरूरी है। उन्होंने बैंककर्मियों से आह्वान किया कि वे 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लें। उनके अनुसार यह आंदोलन अब केवल हड़ताल नहीं, बल्कि श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है।








