एआई सिर्फ तकनीक नहीं, 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का इंजन है – चंदन चौरसिया

Written by Sanjay Kumar

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नई दिल्ली में आयोजित भारत एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक दिशा तय करने वाला नेतृत्वकर्ता बनना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन 2047 – विकसित भारत – के केंद्र में डिजिटल सशक्तिकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की निर्णायक भूमिका है। इस समिट में दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि भारत एआई के क्षेत्र में ग्रीन रिवोल्यूशन जैसी ऐतिहासिक छलांग लगाने की तैयारी में है। भाजपा के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जिस तरह डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को जमीन पर उतारा, उसी क्रम में एआई को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना दूरदर्शी रणनीति का हिस्सा है। एआई अब केवल चैटबॉट या ऑटोमेशन तक सीमित नहीं है; यह कृषि से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा से लेकर रक्षा और गवर्नेंस तक हर क्षेत्र में परिवर्तनकारी शक्ति बनकर उभर रहा है। भाजपा की नीति स्पष्ट है – तकनीक का लोकतंत्रीकरण, ताकि गाँव से लेकर ग्लोबल मार्केट तक भारत की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

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चंदन चौरसिया का मानना है कि यह समिट केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता की घोषणा है। उनके अनुसार, एआई भारत के लिए वही भूमिका निभा सकता है, जो 1960 के दशक में हरित क्रांति ने निभाई थी – फर्क सिर्फ इतना है कि यह क्रांति डिजिटल होगी और इसका लाभ सीधे 140 करोड़ नागरिकों तक पहुँचेगा। भाजपा सरकार ने डेटा लोकलाइजेशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट पर जो फोकस किया है, वह एआई इकोसिस्टम को मजबूत आधार देता है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल प्रस्तुत कर चुका है – यूपीआई, आधार और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसे प्लेटफॉर्म ने यह सिद्ध किया है कि बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी का उपयोग पारदर्शिता और समावेशन दोनों ला सकता है। एआई के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में रोग की शुरुआती पहचान, किसानों के लिए स्मार्ट एग्री-एनालिटिक्स, छात्रों के लिए पर्सनलाइज्ड लर्निंग और छोटे उद्योगों के लिए स्मार्ट सप्लाई चेन संभव हो पाएगी। भाजपा के नेतृत्व में भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि एआई का विकास केवल कॉरपोरेट मुनाफे तक सीमित न रहे, बल्कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र को साकार करे।

मोदी का विजन 2047 केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि भारत को ज्ञान और नवाचार की वैश्विक राजधानी बनाने का संकल्प है। एआई इम्पैक्ट समिट ने यह संदेश दिया है कि भारत भविष्य की टेक्नोलॉजी में नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला देश बनना चाहता है। चंदन चौरसिया के शब्दों में, “विकसित भारत का रास्ता डिजिटल उत्कृष्टता से होकर गुजरता है, और एआई इस यात्रा का सबसे मजबूत इंजन है।” भाजपा सरकार ने स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन, युवाओं को स्किलिंग और शोध संस्थानों को संसाधन देकर जो पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है, वह आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक एआई हब बना सकता है। आज जब दुनिया डेटा और एल्गोरिद्म के दौर में प्रवेश कर चुकी है, भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभ, तकनीकी प्रतिभा और राजनीतिक स्थिरता के कारण अग्रणी स्थिति में खड़ा है। एआई का यह विस्तार केवल जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा नहीं बढ़ाएगा, बल्कि रोजगार, नवाचार और वैश्विक प्रतिष्ठा को भी नई ऊंचाई देगा। 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में यह समिट एक मील का पत्थर है, और भाजपा के नेतृत्व में भारत डिजिटल आत्मनिर्भरता की उस राह पर बढ़ रहा है जहाँ तकनीक केवल सुविधा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति का प्रतीक होगी।

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