ऑनलाइन चालान बना वाहन मालिकों की परेशानी का कारण,शिकायतों पर गंभीर नहीं परिवहन-यातायात विभाग

Written by Sanjay Kumar

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बिहारशरीफ (अपना नालंदा)।ऑनलाइन ट्रैफिक चालान प्रणाली वाहन मालिकों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। जिले में प्रतिदिन पांच से छह ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें बिना गलती के ही वाहनों पर चालान कट जा रहा है। कहीं वाहन घर में खड़ा है और चालान दिल्ली में कट रहा है, तो कहीं बिहारशरीफ में खड़े वाहन पर पटना में हाई स्पीड का चालान लग रहा है। हैरानी की बात यह है कि शिकायत के बावजूद परिवहन एवं यातायात विभाग इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
पीड़ित वाहन मालिकों का कहना है कि तकनीकी खामी या साइबर अपराध के कारण गलत तरीके से चालान कट रहा है, लेकिन विभाग समाधान करने के बजाय जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। अधिकारी वाहन मालिकों को ही समझाकर टाल देते हैं, जिससे मजबूरन उन्हें जुर्माने की राशि भरनी पड़ती है। चालान नहीं चुकाने पर वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र (पीयूसी) और अन्य दस्तावेज बनवाने में भी दिक्कत हो रही है।
हरनौत के चार पहिया वाहन मालिक राजीव कुमार ने बताया कि उनकी गाड़ी का पटना मरीन ड्राइव पर हाई स्पीड के आरोप में दो हजार रुपये का चालान काट दिया गया, जबकि जिस दिन का चालान दिखाया गया है, उस दिन उनकी गाड़ी बिहारशरीफ सदर प्रखंड कार्यालय परिसर में खड़ी थी। मोबाइल पर चालान का संदेश आने के बाद उन्होंने पटना परिवहन कार्यालय में जीपीएस लोकेशन के साथ आवेदन दिया। अब तक चार बार कार्यालय का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
इसी तरह अंबेर निवासी संयोग कुमार का कहना है कि उनके वाहन पर बिना हेलमेट के दो बार चालान कट चुका है। एक बार दिल्ली में और दूसरी बार बिहारशरीफ के पचासा तिराहा पर। दोनों ही मामलों में जिस दिन चालान दिखाया गया, उस दिन उनका वाहन घर में ही खड़ा था। उनका आरोप है कि ई-चालान प्रणाली में ई और एफ अक्षर को सीसीटीवी कैमरा सही तरीके से रीड नहीं कर पा रहा है, जिसके कारण गलत नंबर प्लेट के आधार पर चालान कट रहा है। शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह या तो तकनीकी खामी है या फिर साइबर अपराधियों की करतूत। कुछ पीड़ितों को आशंका है कि चोरी की गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर अपराधी अपराध कर रहे हैं, जिससे निर्दोष वाहन मालिक फंस रहे हैं। इससे लोगों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ रहा है।
जनता की मांग है कि परिवहन और यातायात विभाग को इस समस्या पर गंभीरता दिखानी चाहिए। ई-चालान काटने से पहले नंबर प्लेट की सही पहचान, जीपीएस लोकेशन और समय का मिलान अनिवार्य किया जाए। साथ ही शिकायत दर्ज कराने के लिए सरल और त्वरित प्रक्रिया बनाई जाए, ताकि निर्दोष वाहन मालिकों को बेवजह जुर्माना न भरना पड़े। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

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