संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। स्थानीय ब्रिलिएंट ग्रुप के विशाल सभागार में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर बच्चों के लिए विशेष कार्यशाला सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को साक्षरता के महत्व, शिक्षा की उपयोगिता तथा बदलते समय में डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में विद्यालय के विभिन्न वर्गों के बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और शिक्षा एवं साक्षरता पर आधारित नृत्य-नाटिका, कविता, संगीत तथा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों की खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के निदेशक डॉ. धनंजय कुमार ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। शिक्षा केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर ज्ञान, जागरूकता, आत्मविश्वास और अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति समझ विकसित करती है। उन्होंने कहा कि शिक्षित व्यक्ति न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाने में सक्षम होता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. शशि भूषण कुमार ने अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा और ज्ञान से व्यक्ति में आत्मविश्वास, जागरूकता तथा सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय डिजिटल युग का है, ऐसे में डिजिटल साक्षरता भी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। बच्चों को तकनीक का सही और सुरक्षित उपयोग सीखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केवल किताबी ज्ञान को ही संपूर्ण शिक्षा नहीं माना जा सकता। बच्चों में व्यवहारिक गुण, सामाजिक सरोकार, पारिवारिक दायित्वों की समझ और पर्यावरण के प्रति कर्तव्यनिष्ठा का भाव विकसित होना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है, जो अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें और समाज के प्रति सकारात्मक भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक रंजय सिंह की देखरेख में बच्चों ने बखूबी किया। मंच पर बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं। विद्यालय के विभिन्न वर्गों के छात्र-छात्राओं ने साक्षरता और शिक्षा के महत्व पर आधारित नृत्य-नाटिका, कविता, गीत एवं नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। बच्चों की प्रस्तुतियों में शिक्षा के प्रति जागरूकता, आत्मनिर्भरता, सामाजिक जिम्मेदारी और बेहतर भविष्य की उम्मीद का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

कार्यशाला के दौरान बच्चों को यह भी समझाया गया कि साक्षरता का मतलब केवल अक्षरों को पहचानना या पढ़ना-लिखना सीखना नहीं है। सही मायने में साक्षरता व्यक्ति को अपने आसपास की परिस्थितियों को समझने, सही निर्णय लेने, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और समाज में जिम्मेदारीपूर्वक भूमिका निभाने की क्षमता प्रदान करती है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में विद्यालय की प्राचार्या डॉ. पुष्प लता विद्यार्थी ने भावनात्मक संदेश के साथ बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि साक्षरता का अर्थ केवल अक्षर ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मज्ञान, आत्मविश्वास, जागरूकता और बेहतर भविष्य के अवसर प्रदान करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बच्चों को शिक्षा को अपने जीवन का आधार बनाने के लिए प्रेरित किया।

प्राचार्या ने बच्चों को संकल्प दिलाते हुए कहा कि “हर व्यक्ति साक्षर, हर बच्चा शिक्षित और हर नागरिक सक्षम बने”—यही सही शिक्षा का मार्ग है। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब वे अपने ज्ञान का उपयोग स्वयं के विकास के साथ समाज और राष्ट्र के हित में भी करें।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों और शिक्षकों में खासा उत्साह देखने को मिला। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। शिक्षकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी प्रतिभा की सराहना की तथा भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया।
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक रंजय सिंह, पवन कुमार, विजय कुमार, किशोर कुमार पांडेय, राजकुमार सिंह, सतीश कुमार पांडेय, नाजिम रजा, अमित सिंह, राज भूषण पांडेय, मिथिलेश सर, राज किशोर सिंह, आनंद कुमार, नाजिया खान, द्राक्षण मैडम, चंपा मैडम, मिलन मैडम, सीमा मैडम, सोनम मिस, आरसी मिस, संध्या मिस, सिमरन मिस, हिना खान, सृष्टि मिस, चांदनी मिस एवं दीपू मिस सहित विद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।







