संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन और जिले में स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बुधवार को बिहारशरीफ नगर निगम की ओर से कर्पूरी भवन, बिहारशरीफ में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, नगर निकायों के पदाधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों को ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत पर कचरा पृथक्करण और उसके उचित प्रसंस्करण की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को घर, दुकान, कार्यालय एवं अन्य संस्थानों से निकलने वाले कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग करने के लिए जागरूक करना, कचरे के वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण एवं प्रसंस्करण को बढ़ावा देना तथा लैंडफिल पर निर्भरता को कम करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए केवल नगर निकाय की जिम्मेदारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम में बताया गया कि नए नियमों के प्रभावी अनुपालन के लिए कचरे को मुख्य रूप से चार अलग-अलग श्रेणियों में पृथक रखना जरूरी है। गीले कचरे में भोजन का बचा हुआ हिस्सा, फल-सब्जियों के छिलके, फूल एवं अन्य जैविक सामग्री शामिल हैं। सूखे कचरे में कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच तथा अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को रखा जाना है। वहीं सैनिटरी कचरे में डायपर, सैनिटरी पैड सहित संबंधित अपशिष्ट और स्पेशल केयर कचरे में इस्तेमाल की गई बैटरी, बल्ब, एक्सपायर्ड दवाइयां, पेंट के डिब्बे एवं अन्य विशेष प्रकार के अपशिष्ट शामिल हैं।

प्रशिक्षण के दौरान कचरे के पृथक्करण के साथ-साथ उसके संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को बताया गया कि कचरे को शुरुआत में ही अलग-अलग रखने से उसके प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो जाती है। इससे उपयोगी सामग्री को दोबारा इस्तेमाल करने की संभावना बढ़ती है और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।
अधिकारियों ने कहा कि गीले कचरे से जैविक खाद तैयार करने तथा सूखे कचरे में मौजूद पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग कर उसका उपयोग करने की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। साथ ही ऐसे कचरे का सुरक्षित निस्तारण जरूरी है, जो सामान्य कचरे के साथ मिलकर स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने वार्ड एवं क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली, 2026 के प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की अपील की गई। उन्हें नागरिकों को कचरा अलग-अलग रखने, निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कचरा देने तथा सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फेंकने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी से भी अवगत कराया गया।
प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि स्वच्छता अभियान को केवल सफाई कर्मचारियों या नगर निकाय तक सीमित नहीं रखा जा सकता। घर-घर से कचरे का सही पृथक्करण, नियमित संग्रहण और उसका वैज्ञानिक प्रसंस्करण स्वच्छ शहर की आधारभूत व्यवस्था है। यदि नागरिक कचरे को स्रोत पर ही अलग कर नगर निकाय को उपलब्ध कराते हैं, तो कचरा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था अधिक प्रभावी और टिकाऊ बन सकती है।

प्रशिक्षण फैसिलिटेटर पवन झा द्वारा उपस्थित प्रतिभागियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की नवीन व्यवस्था और नियमों के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में कचरा पृथक्करण से लेकर संग्रहण, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निस्तारण तक की पूरी प्रक्रिया को समझाया गया।
इस अवसर पर नालंदा जिलाधिकारी उदिता सिंह, नगर आयुक्त बिहारशरीफ कृत्यानंद रंजन, बिहारशरीफ नगर निगम की महापौर अनिता देवी, उपमहापौर आईशा शाहीन, प्रशिक्षण फैसिलिटेटर पवन झा, SKS Waste Management Services (OPC) Pvt. Ltd. के प्रतिनिधि, बिहारशरीफ नगर निगम के सभी पार्षदगण, नालंदा जिले के विभिन्न नगर निकायों के मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद, पार्षदगण, कार्यपालक पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से ‘स्वच्छ नालंदा, सुंदर नालंदा और कचरा मुक्त नालंदा’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रशासन, नगर निकायों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के बीच समन्वय एवं सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि सामूहिक प्रयास से ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।







