56 जीविका दीदियों को स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और मानसिक खुशहाली को लेकर दिया गया प्रशिक्षण
हरिओम कुमार
हरनौत (अपना नालंदा)। ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और मानसिक खुशहाली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रखंड मुख्यालय स्थित वीवी जीरामजी भवन (पूर्व नाम मनरेगा) में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन तारा जीविका महिला संकुल संघ की ओर से किया गया। प्रशिक्षण में चेरो संकुल संघ के अंतर्गत आने वाली कुल 56 जीविका कम्युनिटी मोबिलाइजर (सीएम) दीदियों ने भाग लिया।

जीविका बीपीएम मो. आफताब आलम ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जीविका दीदियों को महिलाओं से जुड़ी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं, उनके शुरुआती लक्षणों, बचाव के उपायों तथा पोषण संबंधी जरूरी जानकारी से अवगत कराना था, ताकि वे प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को अपने-अपने गांवों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचा सकें।
यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता (एचएनएस) प्रबंधक नुरुल होदा के निर्देशन में आयोजित किया गया। मुख्य सत्र का संचालन एचएनएस नोडल रेखा कुमारी ने किया। उन्होंने जीविका दीदियों को महिलाओं के जीवन चक्र के विभिन्न चरणों में होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, उनके लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान ‘स्वास्थ्य संजीवनी’ पुस्तिका को आधार बनाकर महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए बीमारी के गंभीर रूप लेने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती लक्षणों की पहचान कर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।

हीमोग्लोबिन और पोषण पर विशेष जोर
प्रशिक्षण में महिलाओं और गर्भवती माताओं में हीमोग्लोबिन की नियमित जांच के महत्व पर विशेष रूप से चर्चा की गई। जीविका दीदियों को थकान, कमजोरी, चक्कर आना जैसे संभावित लक्षणों की पहचान करने की जानकारी दी गई। साथ ही भोजन में आयरन एवं विटामिन-सी से भरपूर पौष्टिक आहार को शामिल करने की सलाह दी गई। जरूरत के अनुसार आईएफए (आयरन-फोलिक एसिड) गोली के सेवन के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।
प्रशिक्षकों ने बताया कि महिलाओं, विशेषकर गर्भवती एवं धात्री माताओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार बेहद जरूरी है। परिवार के सदस्यों को भी महिलाओं के खान-पान और स्वास्थ्य के प्रति विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रसव के बाद और रजोनिवृत्ति में मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। बच्चे के जन्म के बाद तथा रजोनिवृत्ति के समय महिलाओं में होने वाले मानसिक और भावनात्मक बदलावों की जानकारी दी गई।
जीविका दीदियों को बताया गया कि चिड़चिड़ापन, उदासी, तनाव, बेचैनी अथवा व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे समय में परिवार के सदस्यों का सकारात्मक सहयोग और समझ बेहद महत्वपूर्ण होता है। जरूरत पड़ने पर महिला को चिकित्सक अथवा स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने के लिए प्रेरित करने की बात कही गई।
संक्रमण से बचाव और व्यक्तिगत स्वच्छता की जानकारी
प्रशिक्षण में बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमण, उनके संभावित लक्षण और बचाव के उपायों पर भी चर्चा हुई। महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने तथा शौचालय की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई।
दीदियों को समझाया गया कि स्वच्छता की कमी से कई प्रकार के संक्रमण हो सकते हैं, जिन्हें समय पर पहचानना और उपचार कराना जरूरी है। संक्रमण से जुड़ी जटिलताओं और भविष्य में प्रजनन संबंधी समस्याओं के प्रति भी महिलाओं को जागरूक करने की आवश्यकता बताई गई।
‘स्पर्श’ सूत्र से स्वच्छता का संदेश
महिलाओं को संक्रमण से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए ‘स्पर्श’ सूत्र को अपनाने की सलाह दी गई। इसके तहत सफाई, पर्याप्त पानी पीना, आलस्य नहीं करना, रोजाना व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना, सुरक्षित व्यवहार तथा नियमित स्वास्थ्य जांच जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया गया।
अब गांव-गांव जागरूकता फैलाएंगी जीविका दीदियां
प्रशिक्षण के बाद सभी 56 जीविका सीएम दीदियां अपने-अपने गांवों में महिलाओं के बीच स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता फैलाएंगी। वे स्वयं सहायता समूहों की बैठकों और सामुदायिक स्तर पर महिलाओं को स्वास्थ्य संजीवनी पुस्तिका में दी गई जानकारियों से अवगत कराएंगी।
बीपीएम मो. आफताब आलम ने सभी सीएम दीदियों को प्रशिक्षण में मिली जानकारी को केवल अपने तक सीमित नहीं रखने, बल्कि इसे गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जीविका दीदियां ग्रामीण समाज में महिलाओं तक सीधे पहुंच रखने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके माध्यम से स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता से जुड़े संदेशों को बड़ी संख्या में परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षकों ने जीविका दीदियों से अपील की कि वे महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित करें। प्रशिक्षण का समापन जागरूकता संदेश “लक्षण दिखे तो टालिए मत, बीमारी को पालिए मत—तुरंत डॉक्टर से संपर्क कीजिए” के साथ किया गया।
इस प्रशिक्षण को ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।







