संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। बिहार के राजगीर स्थित जू सफारी द्वारा निर्मित अत्याधुनिक एनिमेशन फिल्म “द वाइल्ड कॉल” ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाते हुए दादासाहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2026 में सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म का प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल किया है। इस उपलब्धि ने न केवल बिहार का मान बढ़ाया है, बल्कि राज्य को रचनात्मकता और पर्यावरणीय जागरूकता के क्षेत्र में एक नई पहचान भी दी है।

लगभग 12 मिनट की इस 180 डिग्री इमर्सिव एनिमेटेड फिल्म का निर्माण राजगीर जू सफारी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार द्वारा किया गया है। फिल्म का निर्देशन एस. फरीद और अजहरूद्दीन सुलैमान ने किया है, जिन्होंने तकनीकी नवाचार और कलात्मक दृष्टि का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया है। इस परियोजना को गोपाल सिंह (आईएफएस), क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, पटना तथा रामसुंदर एम (आईएफएस), निदेशक, राजगीर जू सफारी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
“द वाइल्ड कॉल” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव है, जो दर्शकों को भारत की समृद्ध जैव-विविधता से जोड़ता है। इसमें शेर और बाघ के शावकों की रोमांचक यात्रा के माध्यम से देश के विभिन्न प्राकृतिक क्षेत्रों जैसे हिमालय, पश्चिमी घाट, थार मरुस्थल और भारतीय महासागर को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में कुल 23 प्रमुख वन्यजीव प्रजातियों को दर्शाया गया है, जिनमें भारतीय हाथी और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसे दुर्लभ जीव भी शामिल हैं।
फिल्म का संगीत घिब्रान वैबोधा द्वारा तैयार किया गया है, जो दर्शकों के अनुभव को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। उच्च गुणवत्ता वाले एनिमेशन और भावनात्मक प्रस्तुति के कारण यह फिल्म दर्शकों को न केवल मनोरंजन प्रदान करती है, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित करती है।

इस फिल्म का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आवासों की रक्षा और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता फैलाना है। यह दर्शाती है कि किस प्रकार आधुनिक तकनीक और रचनात्मक माध्यमों के जरिए समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाया जा सकता है।
इस उपलब्धि पर राजगीर जू सफारी के निदेशक रामसुंदर एम ने कहा कि “द वाइल्ड कॉल” की सफलता हमारे लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। हमने इसे वैश्विक स्तर की तकनीकी गुणवत्ता और रचनात्मकता के साथ तैयार किया, ताकि यह मनोरंजन के साथ-साथ समाज को जागरूक भी कर सके।
यह सम्मान बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो राज्य को नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और सृजनात्मकता के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।







